गर्मी में पेट की अम्लता से राहत पाने के उपाय: जानें कैसे करें सीने और पेट की जलन का इलाज
सारांश
Key Takeaways
- आहार: मसालेदार और तला हुआ भोजन कम करें।
- आयुर्वेद: शतावरी, शंख भस्म और मुलेठी का सेवन करें।
- रात का भोजन: सूरज ढलने से पहले करें।
- हल्की सैर: भोजन के बाद करें।
- गर्मियों में: हल्के आहार का सेवन करें।
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जैसे ही गर्मियों का मौसम आता है, पेट से जुड़ी समस्याएँ बढ़ने लगती हैं। भूख कम हो जाती है और केवल ठंडा पीने या खाने का मन करता है।
मसालेदार और तेलयुक्त भोजन के सेवन से पेट और सीने में जलन की समस्या गर्मियों में अधिक होती है। कुछ व्यक्तियों को यह जलन सिरदर्द के रूप में भी महसूस होती है। लेकिन, सीने और पेट की जलन का मुख्य कारण केवल आहार नहीं, बल्कि बढ़ता हुआ अम्ल और पित्त दोष भी है।
आयुर्वेद के अनुसार, अम्लता केवल पेट में जलन नहीं है। यह शरीर में पित्त और अम्ल की बढ़ती हुई मात्रा का संकेत हो सकता है। जब पित्त का स्तर बढ़ता है, तो शरीर में कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे पेट में जलन, खट्टी डकार, सिर भारी लगना, या आँखों में जलन। ऐसी स्थिति में आयुर्वेद में कुछ शीतल और पित्त शांत करने वाले द्रव्यों का उल्लेख मिलता है, जैसे शतावरी, शंख भस्म, और मुलेठी। इनका संतुलित उपयोग शरीर की अग्नि को शांत करने और पित्त को संतुलित रखने में मदद करता है।
पहले जानते हैं कि गर्मियों में पित्त और अम्लता क्यों बढ़ जाती है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे देर रात खाना खाना, अधिक मसालेदार और तले हुए भोजन का सेवन, चाय और कॉफी की अधिकता, तनाव, और लंबे समय तक खाली पेट रहना। इसके लिए शतावरी और शंख भस्म का सेवन किया जा सकता है। इन दोनों को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करने से पेट ठंडा रहता है और अम्ल की मात्रा कम होती है।
इसके अलावा, मुलेठी और मिश्री का सेवन भी पेट की जलन को कम करने में मदद करता है। इनका मिश्रण गुनगुने दूध या पानी के साथ लेने से पेट की गर्मी कम होती है और सीने और गले की जलन में आराम मिलता है। अब जानते हैं कि पेट में अम्लता का प्रभाव कम करने के उपाय क्या हैं।
इसके लिए सूरज ढलने से पहले रात का भोजन कर लेना चाहिए। भोजन के बाद तुरंत न बैठें, बल्कि थोड़ी हल्की सैर करें। इससे खाना अच्छे से पचता है और पेट में गैस और खट्टी डकार की समस्या कम होती है। गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाले हल्के आहार लें, जैसे खिचड़ी और दलिया।