सिंहगर्जनासन: मन को शांति और शरीर को ऊर्जा देने वाला आसन
सारांश
Key Takeaways
- सिंहगर्जनासन से मानसिक शांति मिलती है।
- यह शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाता है।
- साधक को गर्जना करनी होती है।
- यह तनाव को कम करता है।
- सावधानी आवश्यक है यदि चोट या दर्द हो।
नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में ऐसे अनेक आसन मौजूद हैं, जो तनाव, डर और दबाव को समाप्त करने में सहायक होते हैं। इनमें से एक प्रसिद्ध आसन है 'सिंहगर्जनासन'।
इस आसन का अभ्यास करते समय साधक को सिंह की भांति जोर से गर्जना करनी होती है। इस क्रिया में मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालकर गले से गहरी आवाज़ निकालते हैं। इससे गला, चेहरा और सांस की नलियां विशेष रूप से लाभान्वित होती हैं। यह आसन शरीर की जकड़न को दूर करने के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार होता है।
सिंहगर्जनासन का अभ्यास सरल है। पहले वज्रासन मुद्रा में बैठें। इसके लिए घुटनों को फैलाकर, एड़ियों को नितंबों के नीचे रखते हुए बैठें। हाथों को घुटनों पर रखें या उंगलियों को जमीन पर टिकाएं। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। फिर ठोड़ी को दो-तीन इंच ऊपर उठाएं और भौहों के बीच देखें। इस दौरान नाक से गहरी सांस लें। जब सांस छोड़ें, तब मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालें और सिंह की तरह गर्जना करें। इस प्रक्रिया को 5-10 बार दोहराएं। अंत में सामान्य सांस लें और आराम करें।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सिंहगर्जनासन का नियमित अभ्यास गले, कान, नाक, आंख और मुंह की समस्याओं से राहत दिलाता है। यह टॉन्सिल, थायरॉइड और सांस संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी है। यह चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जिससे चेहरे पर चमक आती है और समय से पहले झुर्रियां नहीं पड़तीं।
सिंहगर्जनासन का रोजाना अभ्यास मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है। हालाँकि, कुछ सावधानियाँ बरतना आवश्यक है। यदि घुटनों, गले, चेहरे या जीभ में चोट या दर्द है, तो इस आसन का अभ्यास न करें। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग वाले व्यक्तियों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।