क्या 'वंदे मातरम' राजनीति से ऊपर राष्ट्रीय नीति का प्रतिनिधित्व करता है?

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क्या 'वंदे मातरम' राजनीति से ऊपर राष्ट्रीय नीति का प्रतिनिधित्व करता है?

सारांश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 'वंदे मातरम' को भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने इस गीत की 150वीं वर्षगांठ पर इसके महत्व को रेखांकित किया। जानें कि कैसे यह गीत मातृभूमि और उसके बच्चों के बीच के अटूट बंधन का प्रतिनिधित्व करता है।

Key Takeaways

  • वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है।
  • यह मातृभूमि के प्रति कर्तव्य और एकता का संदेश देता है।
  • यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
  • मुख्यमंत्री ने इसे राजनीति से परे एक राष्ट्रीय नीति का प्रतीक बताया।
  • भारत धीरे-धीरे औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकल रहा है।

नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है।

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह गीत नागरिकों को मातृभूमि के प्रति कर्तव्य, एकता और सम्मान की भावना से जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गीत लगभग 150 वर्ष पूर्व रचित हुआ था और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह चेतना का प्रतीक बना।

उनके अनुसार, यह गीत भारत की भूमि, प्रकृति, संस्कृति और सभ्यता का सम्मान करता है तथा हमें याद दिलाता है कि भारत की मिट्टी न केवल अनाज बल्कि मूल्यों और संस्कृति का भी उत्पादन करती है।

विधानसभा में संबोधन करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा करना अत्यंत जरूरी है।

उन्होंने बताया कि वंदे मातरम की 100वीं वर्षगांठ के दौरान देश आपातकाल की स्थिति से गुजर रहा था, जिसके कारण राष्ट्रगान को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार था।

यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक दुखद अध्याय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकास भी, विरासत भी' के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संजोते हुए निरंतर प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

वे यह भी कहा कि देश धीरे-धीरे औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकल रहा है और 'विकसित भारत' के स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस गीत की रचना महान साहित्यकार और राष्ट्रवादी विचारक बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में की थी और इसे 1882 में उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गीत किसी धर्म, संप्रदाय, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा से संबंधित नहीं है, बल्कि मातृभूमि और उसके बच्चों के बीच अटूट बंधन का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि वंदे मातरम राजनीति से ऊपर राष्ट्रीय नीति का प्रतिनिधित्व करता है।

“दुर्भाग्यवश, कुछ लोग इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करते हैं, जबकि गीत का हर शब्द केवल भारत माता की स्तुति में समर्पित है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह गीत भारत की नदियों, पहाड़ों, खेतों और समृद्धि की महिमा का बखान करता है और देश के लोगों को एक सूत्र में पिरोता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश वर्तमान में एक वैचारिक संघर्ष का सामना कर रहा है, जिसे केवल राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से लड़ा जा सकता है।

Point of View

बल्कि यह भारतीय समाज की एकता और राष्ट्रीयता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके महत्व को रेखांकित करते हुए इसे राजनीति से परे एक राष्ट्रीय नीति का प्रतिनिधित्व बताया। यह दृष्टिकोण देश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की आवश्यकता को भी दर्शाता है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या 'वंदे मातरम' का कोई धार्मिक संबंध है?
नहीं, 'वंदे मातरम' किसी भी धर्म या संप्रदाय से संबंधित नहीं है, बल्कि यह मातृभूमि के प्रति प्रेम का प्रतीक है।
इस गीत की रचना कब हुई थी?
'वंदे मातरम' की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी।
क्या यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण था?
हाँ, यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान चेतना का प्रतीक बना।
क्या 'वंदे मातरम' के प्रति लोगों का दृष्टिकोण बदल रहा है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, कुछ लोग इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करते हैं, लेकिन यह मातृभूमि की स्तुति है।
इस गीत की 150वीं वर्षगांठ कब मनाई गई?
इस गीत की 150वीं वर्षगांठ 9 जनवरी 2023 को मनाई गई।
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