क्या केवल कर्ज के आंकड़ों से आर्थिक मजबूती का आकलन किया जा सकता है? पी. चिदंबरम का तमिलनाडु के बचाव में बयान

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क्या केवल कर्ज के आंकड़ों से आर्थिक मजबूती का आकलन किया जा सकता है? पी. चिदंबरम का तमिलनाडु के बचाव में बयान

सारांश

क्या केवल कर्ज के आंकड़ों से आर्थिक मजबूती का आकलन किया जा सकता है? पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उनके विचार से, वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन केवल कर्ज के आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। आइए जानते हैं उनके विचारों के पीछे का तर्क।

Key Takeaways

  • कर्ज और जीडीपी का अनुपात आर्थिक स्वास्थ्य का सही संकेतक है।
  • कर्ज में वृद्धि एक वैश्विक प्रवृत्ति है।
  • राज्य की आर्थिक संरचना की तुलना में सावधानी बरतनी चाहिए।
  • तमिलनाडु का राजकोषीय घाटा लगातार कम हो रहा है।
  • वित्तीय प्रशासन में सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।

चेन्नई, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि किसी राज्य की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन केवल उसके कुल कर्ज के आधार पर करना एक गलत धारणा है, क्योंकि इससे व्यापक आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी होती है।

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए चिदंबरम ने कहा कि सार्वजनिक कर्ज में वृद्धि एक वैश्विक प्रवृत्ति है और इसे केवल तमिलनाडु जैसे राज्यों की आलोचना के लिए नहीं उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी हर वर्ष कुल सार्वजनिक कर्ज बढ़ रहा है।

चिदंबरम ने कहा, “भारत में भी यही स्थिति है। देश का कुल कर्ज और सभी राज्यों का संयुक्त कर्ज हर वर्ष बढ़ता है। यह अपने आप में असामान्य नहीं है।”

पूर्व वित्त मंत्री के अनुसार, किसी राज्य की वित्तीय सेहत का सही पैमाना कुल कर्ज की राशि नहीं, बल्कि कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात है।

उन्होंने कहा, “यही स्वीकार्य और सार्थक मापदंड है,” और यह भी कहा कि तमिलनाडु का कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात 2021-22 से 2025-26 तक स्थिर बना हुआ है।

चिदंबरम ने आगे बताया कि वित्तीय अनुमानों के अनुसार राज्य का राजकोषीय घाटा लगातार कम हो रहा है और तमिलनाडु के 2025-26 तक नीति आयोग के तीन प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, “यह एक सराहनीय उपलब्धि है और जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन को दर्शाती है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि वित्तीय प्रशासन में हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है, लेकिन उन्होंने तमिलनाडु की तुलना उत्तर प्रदेश से करना भ्रामक और अनुचित बताया। उनका कहना था कि दोनों राज्यों की आर्थिक संरचना, राजस्व आधार और विकास की दिशा अलग-अलग है।

चिदंबरम की यह टिप्पणी कांग्रेस नेता और डेटा विश्लेषक प्रवीण चक्रवर्ती के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु के बढ़ते कर्ज की तुलना उत्तर प्रदेश से की थी। इस पर डीएमके की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी, जिसके बाद चिदंबरम ने पार्टी का रुख स्पष्ट करने और इंडिया गठबंधन के भीतर तनाव कम करने के लिए हस्तक्षेप किया।

Point of View

यह स्पष्ट है कि किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन केवल उसके कर्ज के आंकड़ों पर नहीं किया जा सकता। हमें व्यापक आर्थिक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या कर्ज का बढ़ना सामान्य है?
हां, चिदंबरम के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक कर्ज का बढ़ना सामान्य प्रवृत्ति है।
तमिलनाडु का कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात क्या है?
चिदंबरम के अनुसार, तमिलनाडु का कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात 2021-22 से 2025-26 तक स्थिर बना हुआ है।
क्या वित्तीय प्रशासन में सुधार की आवश्यकता है?
चिदंबरम ने स्वीकार किया कि वित्तीय प्रशासन में सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।
क्यों चिदंबरम ने उत्तर प्रदेश की तुलना से इनकार किया?
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की आर्थिक संरचना और विकास की दिशा अलग-अलग है।
क्या चिदंबरम का बयान किसी विशेष राजनीतिक संदर्भ में है?
हाँ, यह बयान उन आलोचनाओं के संदर्भ में है जो तमिलनाडु के कर्ज को लेकर की गई थीं।
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