क्या एफएआईएफए ने तंबाकू पर बढ़े टैक्स को वापस लेने की मांग की?
सारांश
Key Takeaways
- एफएआईएफए ने तंबाकू टैक्स वापस लेने की मांग की है।
- नई एक्साइज ड्यूटी 1 फरवरी से लागू होगी।
- बढ़े हुए टैक्स से किसानों को नुकसान हो सकता है।
- जीएसटी में बदलाव का स्वागत किया गया था।
- अवैध बिक्री बढ़ने का खतरा है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय किसान संघों का महासंघ (एफएआईएफए) ने सरकार से तंबाकू उत्पादों पर लगाए गए भारी टैक्स को वापस लेने और उसमें सुधार की मांग की है। एफएआईएफए का कहना है कि टैक्स को ऐसा रखा जाए, जिससे सरकार की आय पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और तस्करी (अवैध बिक्री) में बढ़ोतरी न हो, साथ ही किसानों को भी नुकसान न हो।
एफएआईएफए ने शुक्रवार को एक बयान में कहा है कि यदि कर नीति स्थिर और संतुलित रहेगी, तो इससे किसानों की आमदनी बनी रहेगी, रोजगार सुरक्षित रहेगा और लंबे समय में लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े लक्ष्य भी पूरे किए जा सकेंगे।
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर तंबाकू से जुड़े कुछ उत्पादों पर 1 फरवरी से नया उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) लगाने की घोषणा की है। इसके तहत सिगरेट की लंबाई के अनुसार 1,000 सिगरेट पर 2,050 रुपए से 8,500 रुपए तक टैक्स लगाया जाएगा।
एफएआईएफए का कहना है कि इतने ज्यादा टैक्स से कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमत बढ़ानी पड़ेगी। इससे बिक्री में कमी आएगी और अंततः किसानों से तंबाकू की खरीद में कमी आ जाएगी। इससे बाजार में तंबाकू की अधिकता होगी और किसानों को नुकसान हो सकता है।
एफएआईएफए के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा कि सरकार ने जीएसटी 2.0 की घोषणा करते समय आश्वासन दिया था कि तंबाकू पर कुल टैक्स पहले जैसा ही रहेगा और जीएसटी खुदरा कीमत के 40 प्रतिशत पर ही लगेगा।
उन्होंने बताया कि किसानों ने सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा किया था और जीएसटी के नियमों में बदलाव का स्वागत भी किया था, क्योंकि इससे कुछ चीजों की कीमतें कम हुई थीं।
सरकार से अपील करते हुए एफएआईएफए के नेताओं ने कहा कि भारत में कानून के अनुसार सिगरेट पहले ही काफी महंगी हैं, विशेषकर लोगों की आमदनी के अनुपात में। यह तथ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में भी सामने आया है।
यदि टैक्स और बढ़ाया गया, तो लोग सही उत्पाद छोड़कर अवैध सामान खरीदने लगेंगे। इससे न तो सरकार को टैक्स मिलेगा और न ही किसानों को लाभ होगा।
एफएआईएफए ने सरकार से अपील की है कि टैक्स नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे कानून मानने वाले किसानों और उद्योगों को सजा न मिले।