क्या सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में किसानों के लिए रिकॉर्ड 834.64 लाख टन उर्वरक उपलब्ध कराए?
सारांश
Key Takeaways
- सरकार ने 834.64 लाख टन उर्वरक उपलब्ध कराया।
- उर्वरक की आवश्यकता 152.50 करोड़ बोरी थी।
- रेलवे और बंदरगाहों ने उर्वरक की आपूर्ति में सहायता की।
- रबी फसलों की बुवाई में वृद्धि हुई है।
- किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की आवश्यकता लगभग 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) आंकी गई थी, जबकि सरकार ने लगभग 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए।
सरकार ने बताया कि किसानों की कृषि संबंधी आवश्यकताओं को समय पर पूरा करने के लिए 2024-25 में रिकॉर्ड मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों की सहायता करने और देशभर में कृषि के कार्यों को निर्बाध रूप से संचालित रखने में सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सरकार के अनुसार, यह सफलता रेलवे, बंदरगाह प्राधिकरण, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के सहयोग से संभव हो सकी।
सरकारी बयान में कहा गया कि भारतीय रेलवे ने उर्वरक परिवहन को प्राथमिकता दी, जिससे उर्वरक तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच सके। वहीं, बंदरगाहों पर आयातित उर्वरकों को शीघ्रता से उतारा गया और आगे भेजने की व्यवस्था की गई।
इसके अलावा, सरकार ने भंडारण और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ किया, ताकि उर्वरक सही समय पर किसानों तक पहुँच सकें।
सरकार ने उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कीं, मांग और आपूर्ति पर निरंतर निगरानी रखी और जहाँ भी समस्या उत्पन्न हुई, उसे तुरंत हल किया।
इन पूर्व-निर्धारित तैयारियों के कारण देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं हुई। सरकार के अनुसार, इसी निरंतर और सामूहिक प्रयासों से पूरे देश में 2024-25 के दौरान रिकॉर्ड उर्वरक उपलब्धता हासिल हुई।
इस बीच, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सर्दी के मौसम में रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष इसी समय 626.64 लाख हेक्टेयर था।
इस प्रकार रबी फसलों की बुवाई में 17.65 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है।
बुवाई क्षेत्र में वृद्धि से फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी।
आंकड़ों के अनुसार, दलहनी फसलों का क्षेत्र 3.74 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि चना की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।