गृह मंत्री अमित शाह करेंगे राष्ट्रव्यापी मोबाइल आपदा चेतावनी प्रणाली 'सचेत' का शुभारंभ, 134 अरब SMS अलर्ट पहले ही भेजे जा चुके

Click to start listening
गृह मंत्री अमित शाह करेंगे राष्ट्रव्यापी मोबाइल आपदा चेतावनी प्रणाली 'सचेत' का शुभारंभ, 134 अरब SMS अलर्ट पहले ही भेजे जा चुके

सारांश

134 अरब से अधिक SMS अलर्ट पहले ही भेजे जा चुके हैं — और अब 'सचेत' प्रणाली एक बड़े अपग्रेड के साथ लौट रही है। गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री सिंधिया शनिवार को SMS के साथ सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक को जोड़कर भारत के आपदा संचार ढाँचे को नई ऊँचाई पर ले जाएँगे।

Key Takeaways

गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शनिवार को राष्ट्रव्यापी मोबाइल आपदा संचार प्रणाली का शुभारंभ करेंगे। प्रणाली को दूरसंचार विभाग (DoT) और NDMA ने मिलकर विकसित किया है; प्लेटफॉर्म C-DOT निर्मित है। अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक SMS अलर्ट भेजे जा चुके हैं। नई सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक नेटवर्क व्यस्तता में भी तत्काल अलर्ट सुनिश्चित करती है। प्रणाली सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू; ITU के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल का पालन। दिल्ली-NCR सहित प्रमुख शहरों में परीक्षण संदेश भेजे जाएँगे; मंत्रालय ने घबराने से बचने की अपील की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शनिवार, 3 मई 2025 को एक राष्ट्रव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ करेंगे, जिसका उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों तक चेतावनियाँ तेज़ और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाना है। इस प्रणाली को दूरसंचार विभाग (DoT) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से विकसित किया है।

क्या है 'सचेत' प्रणाली

इस पहल का केंद्रीय आधार एकीकृत चेतावनी प्रणाली 'सचेत' है, जिसे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही लागू किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म को दूरसंचार विकास केंद्र (C-DOT) ने विकसित किया है। यह प्रणाली मोबाइल उपयोगकर्ताओं को भौगोलिक रूप से लक्षित SMS अलर्ट के माध्यम से चेतावनियाँ देती है और अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा अनुशंसित कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) का पालन करती है।

अब तक का प्रदर्शन

आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा इस प्रणाली का देशभर में व्यापक उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक SMS अलर्ट भेजे जा चुके हैं। इनमें प्राकृतिक आपदाओं, चरम मौसम चेतावनियों और चक्रवाती घटनाओं से संबंधित संदेश शामिल हैं। यह आँकड़ा प्रौद्योगिकी-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक की भूमिका

भूकंप, सुनामी, बिजली गिरने, अचानक बाढ़ और औद्योगिक खतरों जैसी गंभीर स्थितियों में अलर्ट की गति और पहुँच को और मज़बूत करने के लिए, सरकार ने मौजूदा SMS-आधारित प्रणाली के साथ-साथ सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक भी शुरू की है। परंपरागत मैसेजिंग के विपरीत, यह तकनीक एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ अलर्ट भेजने में सक्षम है — यहाँ तक कि नेटवर्क व्यस्तता के दौरान भी लगभग तत्काल डिलीवरी सुनिश्चित होती है। अधिकारियों के अनुसार, SMS और CB प्रणाली के एकीकरण से भारत का आपातकालीन संचार ढाँचा अधिक मज़बूत और वास्तविक समय में सुलभ बनेगा।

देशव्यापी परीक्षण और जनता के लिए सलाह

इस योजना के तहत देशव्यापी परीक्षण भी किया जाएगा, जिसके दौरान दिल्ली-NCR सहित प्रमुख शहरों में मोबाइल उपयोगकर्ताओं को अंग्रेज़ी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये केवल परीक्षण चेतावनियाँ हैं और जनता से किसी प्रकार की कार्रवाई की अपेक्षा नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों से ऐसे संदेश मिलने पर घबराने से बचने की अपील की है। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत में मानसून-पूर्व मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति को देखते हुए त्वरित चेतावनी प्रणालियों की माँग तेज़ी से बढ़ी है।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने अलर्ट समय पर सही लोगों तक पहुँचे और कितने जीवन वास्तव में बचाए गए — यह डेटा अभी सार्वजनिक नहीं है। सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का एकीकरण निस्संदेह एक तकनीकी छलाँग है, लेकिन भारत के ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में नेटवर्क कवरेज की खामियाँ इस प्रणाली की सार्वभौमिक प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। गौरतलब है कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चक्रवात प्रबंधन की सफलता काफी हद तक स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक तैयारी पर निर्भर रही है, न केवल तकनीकी अलर्ट पर। बिना जवाबदेही ढाँचे और स्वतंत्र प्रभाव-मूल्यांकन के, यह लॉन्च एक महत्वपूर्ण अवसर को सुर्खियों तक सीमित कर देने का जोखिम उठाता है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

मोबाइल आपदा संचार प्रणाली 'सचेत' क्या है?
'सचेत' एकीकृत चेतावनी प्रणाली है, जिसे C-DOT ने विकसित किया है और DoT व NDMA ने मिलकर लागू किया है। यह भौगोलिक रूप से लक्षित SMS और सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट के ज़रिए मोबाइल उपयोगकर्ताओं को आपातकालीन चेतावनियाँ देती है और सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है।
सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक सामान्य SMS से कैसे अलग है?
सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ अलर्ट भेजती है, जबकि सामान्य SMS व्यक्तिगत नंबरों पर भेजे जाते हैं। इससे नेटवर्क व्यस्तता के दौरान भी लगभग तत्काल डिलीवरी सुनिश्चित होती है, जो आपदा की स्थिति में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्या परीक्षण के दौरान मिले अलर्ट संदेश से घबराना चाहिए?
नहीं। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देशव्यापी परीक्षण के दौरान दिल्ली-NCR सहित प्रमुख शहरों में भेजे गए संदेश केवल परीक्षण चेतावनियाँ हैं। नागरिकों से किसी प्रकार की कार्रवाई की अपेक्षा नहीं है और मंत्रालय ने घबराने से बचने की अपील की है।
अब तक इस प्रणाली के ज़रिए कितने अलर्ट भेजे जा चुके हैं?
अधिकारियों के अनुसार, अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक SMS अलर्ट भेजे जा चुके हैं। इनमें प्राकृतिक आपदाओं, चरम मौसम चेतावनियों और चक्रवाती घटनाओं से जुड़े संदेश शामिल हैं।
इस प्रणाली को किसने विकसित किया और इसका प्रोटोकॉल क्या है?
इस प्रणाली को दूरसंचार विकास केंद्र (C-DOT) ने विकसित किया है और दूरसंचार विभाग (DoT) व NDMA ने मिलकर लागू किया है। यह अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा अनुशंसित कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) का पालन करती है।
Nation Press