क्या त्रिपुरा में 10 दिनों में 30 लाख से अधिक गांजा के पौधे नष्ट हुए?

Click to start listening
क्या त्रिपुरा में 10 दिनों में 30 लाख से अधिक गांजा के पौधे नष्ट हुए?

सारांश

त्रिपुरा में सुरक्षा बलों ने 10 दिनों में 30 लाख से अधिक गांजा के पौधे नष्ट कर दिए हैं, जिनकी कीमत 145 करोड़ रुपये है। यह अभियान अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए चलाया गया। जानें इस ऑपरेशन की पूरी कहानी और इसके पीछे की जानकारी।

Key Takeaways

  • 30 लाख गांजा के पौधे नष्ट किए गए।
  • कुल कीमत 145 करोड़ रुपये है।
  • अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई।
  • गांजा की खेती अवैध है।
  • नारकोटिक ड्रग्स एक्ट के तहत सजा।

अगरतला, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के सेपाहिजाला जिले में सुरक्षा बलों ने हालिया अभियान में और छह लाख गांजे के पौधे नष्ट कर दिए। इस प्रकार, मात्र 10 दिनों में कुल लगभग 30 लाख गांजे के पौधे नष्ट हो चुके हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 145 करोड़ रुपये है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के एक प्रवक्ता के अनुसार, बुधवार देर शाम तक चले इस संयुक्त अभियान में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों ने मिलकर लगभग 200 एकड़ भूमि पर 65 प्लॉट में उगाए गए लगभग छह लाख गांजे के छोटे पौधों को नष्ट किया। नष्ट किए गए पौधों की अनुमानित कीमत लगभग 36 करोड़ रुपये है।

त्रिपुरा पुलिस, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स, असम राइफल्स, और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने मिलकर सेपाहिजाला जिले के तीन पुलिस स्टेशन क्षेत्रों - सोनमुरा, मेलागढ़, और कलामचौरा - के तहत धनपुर, इंदुरिया, कच्चाखला, और धनमुरा गांवों में गांजे के पौधों को नष्ट किया। यह जिला बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करता है।

असम राइफल्स ने एक बयान में कहा कि यह ऑपरेशन अवैध गतिविधियों को रोकने और क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोगी एजेंसियों के साथ मिलकर उनकी सतर्कता और समन्वित प्रयासों का परिचायक है।

इससे पूर्व, सुरक्षा बलों ने दो अलग-अलग ऑपरेशनों में सेपाहिजाला जिले में ही 414 एकड़ पहाड़ी भूमि पर फैले 23 लाख से अधिक गांजे के पौधे नष्ट किए, जिनकी कीमत लगभग 108 करोड़ रुपये थी।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसी दौरान, उनाकोटी, दक्षिण त्रिपुरा, और खोवाई के अन्य जिलों में भी कई लाख अवैध गांजे के पौधे नष्ट किए गए।

नशीले पदार्थों के खिलाफ ऑपरेशन का नेतृत्व जिला पुलिस अधीक्षक या अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक ने किया। अवैध खेती में शामिल कई लोगों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि कई मौकों पर यह पाया गया है कि जंगल की भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर कब्जा करके गांजे की खेती की जा रही थी।

उन्होंने आगे कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति के लिए नशीले और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की खेती करना, रखना, बेचना, खरीदना या सेवन करना गैर-कानूनी है। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और 20 साल तक की जेल हो सकती है।

ड्रग्स के खिलाफ एक ऑपरेशन में बुधवार देर रात पुलिस ने खास इंटेलिजेंस के आधार पर, पश्चिम बंगाल रजिस्ट्रेशन नंबर वाले एक ट्रक से 12,600 बोतल एस्कुफ कफ सिरप, 16 हजार रुपए कैश और दो मोबाइल फोन जब्त किए।

इस जब्ती के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

Point of View

NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

त्रिपुरा में गांजा की खेती पर समय-समय पर कार्रवाई क्यों होती है?
गांजा की खेती अवैध है और इसके खिलाफ कार्रवाई नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए की जाती है।
क्या गांजा की खेती करने पर सजा होती है?
हाँ, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत गांजा की खेती करने पर सजा और जुर्माना हो सकता है।
इस ऑपरेशन में कितने पौधे नष्ट किए गए?
हालिया अभियान में लगभग 30 लाख गांजा के पौधे नष्ट किए गए हैं।
Nation Press