बेबी अरिहा शाह का मामला: पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर से क्या बात की?
सारांश
Key Takeaways
- बेबी अरिहा शाह का मामला एक जटिल कानूनी और मानवीय मुद्दा है।
- भारत ने जर्मन सरकार के साथ सक्रिय संवाद बनाए रखा है।
- अरिहा की परवरिश भारतीय माहौल में सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- इस मामले में दोनों देशों के रिश्तों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- माता-पिता के अधिकारों की बहाली के लिए प्रयास जारी हैं।
गांधीनगर, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने बेबी अरिहा शाह का मामला उठाया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। आइए जानते हैं कि बेबी अरिहा शाह का मामला क्या है, जिसका जिक्र पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने किया।
बेबी अरिहा जर्मन फॉस्टर केयर में पल रही एक भारतीय बच्ची है। जर्मन चांसलर के भारत दौरे को लेकर एक खास ब्रीफिंग में मिस्री ने कहा कि भारत इस मामले में जर्मन सरकार के साथ निरंतर संपर्क में रहेगा और हर कदम पर परिवार को अपडेट करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि बेबी अरिहा की परवरिश भारतीय माहौल में हो, जैसे भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करना और भारतीय त्योहारों का जश्न मनाना।
अरिहा शाह केस के संदर्भ में उन्होंने कहा, "हम काफी समय से जर्मन अधिकारियों, दिल्ली में उनके दूतावास, और बर्लिन में जर्मन सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह मामला एक समय कानूनी था, लेकिन हमें मानवीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"
विक्रम मिस्री ने यह भी कहा, "हम परिवार की परेशानी को समझते हैं और हर संभव मदद की कोशिश कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बेबी अरिहा की परवरिश अधिकतम भारतीय माहौल में हो, चाहे वह भारतीय त्योहारों में भाग लेना हो या हिंदी सीखना।"
उन्होंने कहा, "हाल ही में, हमने अन्य प्रयासों के लिए भी काम किए हैं। मैं इसके बारे में विस्तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन हम इस मुद्दे पर जर्मन सरकार के साथ हर चरण पर सक्रिय हैं, और पीएम मोदी ने भी चांसलर से इस विषय पर बात की है।"
भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि हम इस मुद्दे को भारत-जर्मनी संबंधों से जुड़े अन्य मामलों के समान प्राथमिकता दे रहे हैं। मेरे यूरोप के अतिरिक्त सचिव परिवार के संपर्क में रहते हैं। जब भी परिवार यहाँ आता है, वह उनसे मिलते हैं। हम हर संभव कोशिश कर रहे हैं और आपको समय-समय पर इस मामले में अपडेट देते रहेंगे।
बता दें, अरिहा शाह को 23 सितंबर, 2021 को जर्मनी के यूथ वेलफेयर ऑफिस (जुगेंडम्ट) की कस्टडी में रखा गया था। उस समय अरिहा सात महीने की थी जब उसे चोट लगी थी। तब से वह फॉस्टर केयर में है। भारत का कहना है कि बच्चे के लिए उसके भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक माहौल में रहना आवश्यक है।
पिछले साल सितंबर में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि उन्होंने नई दिल्ली में जर्मन काउंटरपार्ट जोहान वाडेफुल के साथ मीटिंग के दौरान अरिहा शाह का मामला उठाया था।
अरिहा के माता-पिता धरा शाह और भावेश शाह गुजरात के निवासी हैं, जो 2018 में काम के लिए जर्मनी चले गए थे। 2021 में अरिहा का जन्म हुआ, और जब वह 7 महीने की थी, तो उसकी नानी उसे गोद में खिलाते समय उसे चोट लगी। चोट लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने बच्ची की चोट को देखकर ‘यौन प्रताड़ना’ का संदेह जताया। अस्पताल ने तुरंत जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी ‘यूगेंडम्ट’ को सूचित किया। इसके बाद यूगेंडम्ट ने बच्ची को माता-पिता से अलग कर अपनी कस्टडी में ले लिया और तब से अरिहा को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।
बच्ची को कस्टडी में लेने के बाद जर्मन पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और डीएनए टेस्ट समेत कई मेडिकल जांचों में यह साबित हो गया कि बच्ची के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ था। फिर 2022 की शुरुआत में पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ क्रिमिनल केस बंद कर दिया। धरा और भावेश के निर्दोष साबित होने के बाद भी जर्मनी की ‘चाइल्ड लाइन सर्विस’ ने बच्ची को लौटाने से मना कर दिया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि भले ही यौन शोषण नहीं हुआ, लेकिन माता-पिता ने बच्ची के साथ ‘हिंसक व्यवहार’ किया या वे उसकी देखभाल में लापरवाह रहे हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने माता-पिता के ‘पैरेंटिंग राइट्स’ खत्म कर दिए और बच्ची को फोस्टर केयर में डाल दिया।