क्या कांग्रेस मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझती है और नेतृत्व में पीछे हटती है?

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क्या कांग्रेस मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझती है और नेतृत्व में पीछे हटती है?

सारांश

एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वे मुसलमानों को केवल वोट बैंक समझते हैं, जबकि भाजपा की नीयत भी संदिग्ध है। क्या यह सच है कि कांग्रेस मुसलमानों को नेतृत्व के अवसर नहीं देती?

Key Takeaways

  • कांग्रेस को मुसलमानों के राजनीतिक सशक्तिकरण में रुचि नहीं है।
  • भाजपा और कांग्रेस दोनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
  • भारत का संविधान समानता पर आधारित है, जो हर धर्म और जाति के लोगों को समान अवसर देता है।
  • वारिस पठान ने मुसलमानों की पिछड़ी स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
  • एआईएमआईएम मुसलमानों को राजनीतिक नेतृत्व देने की दिशा में काम कर रही है।

मुंबई, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बन सकती है। इस विषय पर उठ रहे सवालों के बीच एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने पार्टी के स्टैंड का समर्थन करते हुए कांग्रेस और भाजपा पर हमला किया है।

उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल मुसलमानों को एक वोट बैंक के रूप में देखती है और उन्हें नेतृत्व के अवसर प्रदान करने में हमेशा पीछे हटती रही है। वारिस पठान ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भाजपा के नेता अक्सर कहते हैं कि कोई व्यक्ति मेयर या प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन ओवैसी के बयान का वास्तविक अर्थ भारत के संविधान से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वहां केवल एक विशेष धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बन सकता है, जबकि भारत के संविधान में, जिसे डॉ भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया, समानता का सिद्धांत है। भारतीय संविधान में यह नहीं कहा गया है कि कोई विशेष धर्म, जाति या वर्ग का व्यक्ति ही शीर्ष पद पर बैठ सकता है। भारत में किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच सकता है। इसी भावनाओं के तहत एआईएमआईएम की यह आशा है कि भविष्य में एक हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री या मेयर बन सकती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस पार्टी को इस बात से आखिर क्या तकलीफ है। वारिस पठान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीयत स्पष्ट है, क्योंकि पार्टी को मुसलमानों की राजनीतिक नेतृत्व क्षमता या सशक्तिकरण से कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस को केवल मुसलमानों के वोट चाहिए, लेकिन उन्हें नेतृत्व के अवसर देने में पार्टी हमेशा पीछे हटी है।

वारिस पठान ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 सीटों में से कांग्रेस ने एक भी मुसलमान उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। जब मुसलमानों को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा तो वे सांसद कैसे बनेंगे और प्रधानमंत्री बनने की संभावना कैसे बनेगी? उन्होंने कहा कि आज मुसलमान एक पिछड़ा वर्ग बन चुका है, जिसकी पुष्टि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट भी करती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो पार्टियां सालों तक सत्ता में रहीं, उन्होंने सत्ता का आनंद लिया, लेकिन मुसलमानों को केवल एक वोट बैंक समझा। वारिस पठान ने कहा कि इन दलों ने मुसलमानों की शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, जिसके कारण आज यह समुदाय सामाजिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम इस मानसिकता को बदलने और मुसलमानों को राजनीतिक नेतृत्व और सशक्तिकरण देने की लड़ाई लड़ रही है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक दलों को सभी समुदायों के सशक्तिकरण की आवश्यकता है। केवल वोट बैंक की मानसिकता से आगे बढ़कर अगर कोई पार्टी मुसलमानों को नेतृत्व के अवसर नहीं देती है, तो यह उनके विकास और समाज के लिए हानिकारक है।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

क्यों वारिस पठान ने कांग्रेस पर निशाना साधा?
वारिस पठान का कहना है कि कांग्रेस मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है और उन्हें नेतृत्व के अवसर नहीं देती।
क्या असदुद्दीन ओवैसी का बयान महत्वपूर्ण है?
जी हाँ, ओवैसी का बयान भारत के संविधान में समानता पर आधारित है, जो एक सकारात्मक संदेश है।
कांग्रेस ने मुसलमानों को टिकट क्यों नहीं दिया?
वारिस पठान के अनुसार, कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में मुसलमानों को टिकट नहीं देकर उनकी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की अनदेखी की।
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