क्या वामपंथी समर्थक रेजी लुकोस ने भाजपा में शामिल होकर पुरानी विचारधाराओं को नकार दिया?

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क्या वामपंथी समर्थक रेजी लुकोस ने भाजपा में शामिल होकर पुरानी विचारधाराओं को नकार दिया?

सारांश

केरल में वामपंथी समर्थक रेजी लुकोस ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पुरानी विचारधाराएं अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं। यह बदलाव केवल उनकी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि केरल की राजनीति में एक नया मोड़ लाने का संकेत है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे के कारण।

Key Takeaways

  • रेजी लुकोस का भाजपा में शामिल होना एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है।
  • उन्होंने पुरानी विचारधाराओं को नकारा है।
  • केरल में युवा मतदाता अब विकास की ओर अग्रसर हैं।
  • सीपीआई (एम) ने लुकोस को अपनी पार्टी से अलग कर लिया है।
  • राजनीतिक दलों को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

तिरुवनंतपुरम, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल में वामपंथी समर्थक रेजी लुकोस ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। उनका कहना है कि पुरानी विचारधाराओं का अब कोई महत्‍व नहीं रह गया है।

केरल में राजनीतिक दल-बदल कोई नई बात नहीं है। इस बार जिस बात ने ध्यान आकर्षित किया है, वह यह है कि यह उथल-पुथल अब केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों या पार्टी पदाधिकारियों तक ही सीमित नहीं है।

मीडिया जगत के पेशेवर और जाने-माने टेलीविजन वाद-विवादकर्ता—जिन्हें लंबे समय से वैचारिक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है—वह भी अब एक-दूसरे की सीमाओं को पार करने लगे हैं। इससे राजनीतिक टिप्पणी और सक्रिय राजनीति के बीच की रेखा धुंधली हो रही है।

इसका ताजा और सबसे उल्लेखनीय उदाहरण रेजी लुकोस हैं। वे मलयालम टेलीविजन बहस में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, जो वामपंथी विचारधारा की आवाज को उठाते हैं।

लुकोस पार्टी के राज्य मुख्यालय में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए, जहां उन्हें राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर द्वारा पदभार ग्रहण कराया गया।

उनके इस कदम ने न केवल उस पार्टी के कारण चर्चा को जन्म दिया है जिसमें वे शामिल हुए हैं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह केरल के राजनीतिक तंत्र में एक व्यापक बदलाव को दिखाता है, जहां राय बनाने वाले लोग स्वयं पक्षपातपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं।

लुकोस ने अपने फैसले को समझाते हुए कहा कि पुरानी विचारधाराओं से प्रेरित राजनीति का केरल में अब कोई महत्व नहीं रह गया है और उन्हें भाजपा के विकासोन्मुखी दृष्टिकोण में उम्मीद नजर आती है।

उन्होंने तर्क दिया कि वैचारिक रूप से, राज्य अभी उस दौर में नहीं है जिसमें राजनीतिक संघर्ष की आवश्यकता हो। अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में युवा केरल छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो राज्य एक वृद्ध समाज में तब्दील होने का जोखिम है।

उन्होंने कहा कि केरल को अब वैचारिक कठोरता के बजाय विकास की आवश्यकता है, और यह स्पष्ट कर दिया कि वह अब से केवल भाजपा के लिए ही बोलेंगे और काम करेंगे।

सीपीआई (एम) ने तुरंत खुद को इससे अलग कर लिया, और उसकी कोट्टायम जिला समिति ने कहा कि लुकोस (जो कोट्टायम के रहने वाले हैं) कभी भी किसी पार्टी संरचना का हिस्सा नहीं थे। इसमें कहा गया कि उन्हें पहले भी टेलीविजन चर्चाओं में खुद को वामपंथी साथी के रूप में पेश करने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी, और यह भी कहा गया कि यह लेबल काफी हद तक मीडिया द्वारा गढ़ा गया था।

लुकोस का स्वागत करते हुए केरल भाजपा ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्ट किया कि केरल की राजनीति में सीपीआई (एम) का चेहरा रहे वरिष्ठ नेता रेजी लुकोस राज्य कार्यालय में आयोजित एक समारोह में पार्टी में शामिल हो गए हैं।

पार्टी ने कहा कि विकास की गतिरोध और तुष्टीकरण की राजनीति पर आधारित वामपंथी राजनीति को नकारते हुए राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर द्वारा प्रतिपादित विकसित केरलम की अवधारणा के प्रभाव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है।

Point of View

NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

रेजी लुकोस का भाजपा में शामिल होना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह कदम केरल की राजनीति में विचारधाराओं के परिवर्तन का संकेत है और यह दर्शाता है कि युवा मतदाता अब विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या लुकोस ने पहले भाजपा में शामिल होने की योजना बनाई थी?
लुकोस ने कहा कि पुरानी विचारधाराओं से प्रेरित राजनीति अब अप्रासंगिक है, जो सुझाव देता है कि उनका यह निर्णय एक विचारशील प्रक्रिया का परिणाम है।
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