क्या जम्मू-कश्मीर के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने प्रशासन पर नजरबंदी का आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- मीरवाइज उमर फारूक ने प्रशासन पर नजरबंदी का आरोप लगाया है।
- उन्हें जामिया मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका गया।
- इस घटना ने कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को उजागर किया है।
श्रीनगर, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेता मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को अपनी कथित नजरबंदी के कारण जामिया मस्जिद में नमाज-ए-जुमा अदा नहीं कर पाने की बात कही। इस मुद्दे पर उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
मीरवाइज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा की है, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने लिखा, "एक और शुक्रवार और एक बार फिर अधिकारियों ने मुझे जामा मस्जिद जाने की अनुमति नहीं दी। यह बहुत ही निराशाजनक है कि इस असामान्य रूप से सूखी सर्दियों में मैं सामूहिक दुआ में नमाजियों का नेतृत्व नहीं कर सका। हमारी दुआएं ही हमारी शक्ति हैं, अल्लाह उन्हें कुबूल करे।"
इससे पहले, मीरवाइज ने एक दावे में कहा था कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें घर में नजरबंद कर रखा है। उन्होंने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर की जनता के प्रति जवाबदेह हैं और हमेशा कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत का समर्थन करते आए हैं। उन्होंने कहा, "जब मेरे पिता की हत्या हुई थी, तब मैं एक नाबालिग था और मुझे छोटी उम्र में ही धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा।"
ज्ञात रहे कि इससे पहले 2 जनवरी को मीरवाइज ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस दिन उन्हें जामा मस्जिद में नमाज के दौरान लोगों को संबोधित करना था, उस दिन वे एक बार फिर नजरबंदी के कारण अपनी बात सोशल मीडिया के माध्यम से रखने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा, "साल 2026 की शुरुआत भले ही उम्मीदों के साथ हो रही हो, लेकिन 2025 की दर्दनाक यादें अब भी लोगों के दिलों में ताजा हैं। पिछले साल त्रासदी और अनिश्चितता से भरा रहा। पहलगाम में हुए भयावह हमले ने पूरे कश्मीर को हिला कर रख दिया था। घाटी के सभी वर्गों ने इस हमले की निंदा की थी, लेकिन इसके बाद आम लोगों में गहरा डर और बेचैनी फैल गई। कई जगहों पर लोगों को निशाना बनाया गया और उनके घरों को तोड़ा गया।"