क्या कभी दो शब्द बोलने में भी कतराते थे ऋतिक रोशन? आज बॉलीवुड के हैं 'ग्रीक गॉड'
सारांश
Key Takeaways
- ऋतिक रोशन ने अपने संघर्ष से साबित किया कि मेहनत से हर बाधा पार की जा सकती है।
- बचपन में हकलाने की समस्या के बावजूद, उन्होंने आत्मविश्वास पाया।
- ऋतिक का बॉलीवुड में डेब्यू 'कहो ना... प्यार है' से हुआ।
- उन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं, जो उनकी क्षमता को दर्शाते हैं।
- उनकी कहानी सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
मुंबई, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड के 'ग्रीक गॉड' ऋतिक रोशन हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों में से एक माने जाते हैं। डांस, एक्टिंग और दमदार लुक के कारण उन्होंने लाखों प्रशंसकों के दिलों पर राज किया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस चमक-दमक के पीछे उनका एक लंबा संघर्ष छिपा हुआ है।
ऋतिक को बचपन में हकलाने की समस्या का सामना करना पड़ा। छोटे-छोटे शब्द बोलना उनके लिए इतना कठिन था कि वे अक्सर खुद को बाथरूम या अलमारी में बंद कर लेते थे। लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन से अपनी मुश्किलों पर विजय प्राप्त की।
ऋतिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ था। वे एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता राकेश रोशन बॉलीवुड के प्रसिद्ध डायरेक्टर और निर्माता हैं, जबकि उनकी मां पिंकी रोशन एक गृहिणी हैं। उनके दादा रोशनलाल नागरथ एक संगीतकार थे और उनके चाचा राजेश रोशन भी संगीत में सक्रिय रहे। ऐसे परिवार में जन्म लेने के बावजूद ऋतिक का बचपन आसान नहीं था।
ऋतिक को बचपन से ही हकलाने की समस्या थी। स्कूल के दिनों में उन्हें बोलने में कठिनाई होती थी। कई बार उनका मजाक भी बनाया जाता था। लेकिन ऋतिक ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस कमजोरी को दूर करने के लिए रोजाना अखबार पढ़ने की आदत डाली। हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू अखबार पढ़कर उन्होंने धीरे-धीरे बोलने की क्षमता बढ़ाई। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और वह हकलाने की बीमारी पर काबू पाने में सफल हुए।
ऋतिक ने 10 साल की उम्र में ही चाइल्ड एक्टर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। वे रजनीकांत की फिल्म 'भगवान दादा' में नजर आए। उस समय वे छोटे थे, लेकिन बड़े सितारों के साथ काम करने का अनुभव उन्हें सीखने का अवसर देता रहा।
बॉलीवुड में ऋतिक का असली डेब्यू 2000 में फिल्म 'कहो ना... प्यार है' से हुआ। इस फिल्म ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया। इस सफलता के बाद ऋतिक के पास लगातार फिल्मों के ऑफर्स आने लगे। हालांकि पहली फिल्म की ब्लॉकबस्टर सफलता को बनाए रखना उनके लिए आसान नहीं था। ऋतिक की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर वैसा करिश्मा नहीं कर सकीं, लेकिन उनका क्रेज कभी कम नहीं हुआ।
युवा चॉकलेटी चेहरे, दमदार बॉडी, डांस और स्टाइल ने उन्हें यूथ आइकन बना दिया था। सलमान खान के बाद ऋतिक रोशन ने 2000 के दशक में युवाओं में फिटनेस को एक पैशन बना दिया था। उन्होंने रोमांटिक, एक्शन और ड्रामा, हर तरह के किरदार निभाए। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें दर्शकों के बीच एक अलग पहचान दिलाई।
ऋतिक को कई पुरस्कार भी मिले। उन्होंने बेस्ट डेब्यू, बेस्ट एक्टर, और बेस्ट डांसर जैसे कई अवॉर्ड्स जीते। उनकी 'धूम 2', 'कृष', 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा', और 'सुपर 30' जैसी फिल्मों ने उन्हें महान सफलता दिलाई। भले ही ऋतिक के करियर और निजी जीवन में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें न केवल फैंस का अपितु इंडस्ट्री में भी सम्मान दिलाया है। आज वे एक परिपक्व कलाकार के रूप में हिंदी सिनेमा में स्थापित हो चुके हैं।