क्या ढाई साल की उम्र में लड़कों का किरदार निभाने वाली हनी ईरानी का मीना कुमारी से खास रिश्ता है?
सारांश
Key Takeaways
- हनी ईरानी ने ढाई साल की उम्र में सिनेमा में कदम रखा।
- उनका मीना कुमारी के साथ गहरा संबंध था।
- हनी ने कई सफल फिल्मों के लिए पटकथा लिखी है।
मुंबई, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। क्या आपने कभी सुना है, ‘पूत के पांव पालने में नजर आते हैं।’ यह कहावत बच्चों के भविष्य और गुणों का आकलन करती है। इसी कहावत को सही साबित करती हैं हनी ईरानी, जिन्हें आज हम फरहान और जोया अख्तर की मां के रूप में पहचानते हैं।
बहुत से लोगों को यह नहीं पता होगा कि 1960 के दशक में एक ऐसा समय भी था, जब वे उस समय के सबसे बड़े सितारों के बराबर लोकप्रिय थीं और लगभग हर फिल्म में बाल कलाकार के रूप में नजर आती थीं।
17 जनवरी को जन्मी हनी ईरानी ने ढाई साल की उम्र में हिंदी सिनेमा में बतौर बाल कलाकार डेब्यू किया था। वे अकेली नहीं थीं, उनकी बहन डेजी ईरानी भी उनके साथ थीं।
दोनों बहनों के घुंघराले बाल और उनकी अदाओं ने सभी का दिल जीत लिया। आलम यह हो गया कि दोनों बहनों या किसी एक को फिल्म में कास्ट करने के लिए विशेष स्थान बनाया जाने लगा, यहां तक कि स्क्रिप्ट्स में भी बदलाव होने लगा।
बचपन में ही हनी ईरानी का मन मीना कुमारी से जुड़ गया था, क्योंकि वे वास्तव में उनमें मां की छवि देखने लगी थीं। 1959 में आई फिल्म ‘चिराग कहां रोशनी कहां’ में हनी ने मीना कुमारी के साथ काम किया था। फिल्म में घुंघराले बालों की वजह से उन्होंने नन्हें राजू की भूमिका निभाई थी। इस दौरान मीना कुमारी ने हनी और उनकी बहन डेजी को इतना प्यार दिया कि उन्हें सेट पर कभी मां की कमी महसूस नहीं हुई।
मीना कुमारी ने सेट पर दोनों का इस तरह ध्यान रखा जैसे वे उनके अपने बच्चे हों। सेट पर दोनों के बीच का प्यार देखकर अन्य लोग भी हैरान रह जाते थे। मीना कुमारी और हनी ईरानी की जोड़ी फिल्म ‘चिराग कहां रोशनी कहां’ में हिट रही, और बाद में यह जोड़ी 1960 में आई ‘संतान’, ‘एक ही रास्ता’, और ‘गोमती के किनारे’ जैसी फिल्मों में भी दर्शकों के सामने आई।
मीना कुमारी और हनी का संबंध केवल सेट तक सीमित नहीं था। असल जिंदगी में भी मीना दोनों को अपने बच्चों की तरह समझती थीं।
हनी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मीना कुमारी सेट पर उन्हें अपने बच्चों की तरह चाहती थीं। हनी ने मीना कुमारी को सनशाइन वुमेन का टाइटल भी दिया था, जिन्होंने उनकी जिंदगी को रोशनी से भर दिया।
हनी ईरानी केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली लेखिका भी रहीं। उन्होंने ‘कहो ना प्यार है’, ‘कोई मिल गया’, ‘लम्हें’, ‘आइना’, ‘डर’, और ‘क्या कहना’ जैसी फिल्मों के लिए सफल पटकथा लिखी।