20 अक्टूबर 2026
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देवास के रजोदा गांव में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खी हमला, 20 से अधिक घायल, 11 अस्पताल में

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देवास के रजोदा गांव में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खी हमला, 20 से अधिक घायल, 11 अस्पताल में

सारांश

देवास के रजोदा गांव में जवारा विसर्जन के दौरान पीपल के पेड़ के छत्ते पर पानी की छींटें पड़ने से भड़की मधुमक्खियों ने 20 से अधिक श्रद्धालुओं को डंक मारे। यह देवास जिले में एक महीने में दूसरी ऐसी घटना है — सोनकच्छ के अगेरा में भी 25 लोग घायल हुए थे।

मुख्य बातें

देवास जिले के रजोदा गांव में 20 अक्टूबर 2026 को जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खी हमले में 20 से अधिक लोग घायल हुए।
घटना सुबह करीब 9 बजे हुई जब कुएं में कूदे लोगों द्वारा उड़ी पानी की छींटों से ऊपर पीपल के पेड़ पर बना छत्ता भड़क गया।
घायलों में से 11 लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाकी का स्थानीय स्तर पर उपचार हुआ।
कुछ लोग मधुमक्खियों से बचते-बचाते लगभग दो किलोमीटर तक भागे; करीब 15 मिनट तक जालों के नीचे छिपे रहे।
इससे पहले देवास के सोनकच्छ क्षेत्र के अगेरा गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान भी मधुमक्खी हमले में 25 लोग घायल हुए थे।
प्रशासन ने भविष्य के सामूहिक कार्यक्रमों में छत्तों की जाँच कर सावधानी बरतने की सलाह जारी की।

मध्य प्रदेश के देवास जिले के रजोदा गांव में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पारंपरिक जवारा विसर्जन अनुष्ठान के दौरान मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें 20 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में से 11 लोगों को तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला

यह घटना सुबह करीब 9 बजे हुई, जब रजोदा गांव के ग्रामीण स्थानीय परंपरा के अनुसार जवारा विसर्जन के लिए एक कुएं के पास एकत्रित हुए थे। अनुष्ठान के दौरान पाँच-छह लोग कुएं में नहाने के लिए कूद गए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुएं के ठीक ऊपर एक पीपल के पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता था। नहाते समय पानी की छींटें उस छत्ते पर जा पड़ीं, जिससे मधुमक्खियाँ भड़क उठीं और उन्होंने वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं पर जोरदार हमला कर दिया।

अफरा-तफरी और बचाव के प्रयास

मधुमक्खियों के झुंड के नीचे आते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए हर दिशा में भागने लगे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ लोग मधुमक्खियों से बचते-बचाते लगभग दो किलोमीटर तक दौड़ते रहे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने नीम की टहनियों और अपने हाथों से मधुमक्खियों को दूर भगाने की कोशिश की। शुरुआती हमले के बाद कई लोगों ने खुद को जालों से ढक लिया और करीब 15 मिनट तक उसी के नीचे छिपे रहे, जबकि मधुमक्खियाँ उनके सिर के ऊपर मंडराती रहीं। झुंड के हटने के बाद ही वे बाहर निकल सके।

घायलों की स्थिति और चिकित्सा सहायता

कई घायलों के सिर, हाथों और शरीर के अन्य हिस्सों पर मधुमक्खियों ने कई-कई बार डंक मारे। देवास के चिकित्सा कर्मी रजोदा की इस घटना में घायल हुए सभी लोगों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती 11 लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।

इससे पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

गौरतलब है कि यह देवास जिले में इस प्रकार की दूसरी घटना है। इसी जिले के सोनकच्छ इलाके के अगेरा गांव में हाल ही में मूर्ति विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों ने श्रद्धालुओं पर हमला किया था। उस घटना में लगभग 25 लोग घायल हुए थे, जिनमें से करीब 13 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है जो सार्वजनिक समारोहों में सुरक्षा पर सवाल उठाती है।

प्रशासन की सलाह और आगे की तैयारी

इस घटना के बाद ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि भविष्य में किसी भी सामूहिक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान, जहाँ मधुमक्खियों के छत्ते हों, वहाँ विशेष सावधानी बरती जाए। स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि वह ऐसे क्षेत्रों में पहले से सर्वेक्षण कर आवश्यक कदम उठाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएँ रोकी जा सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आयोजन स्थल के आसपास मधुमक्खी छत्तों की पहचान और हटाना प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। यह पैटर्न सुझाता है कि स्थानीय निकायों को धार्मिक आयोजनों के लिए एक मानकीकृत सुरक्षा प्रोटोकॉल की ज़रूरत है — न कि केवल घटना के बाद की सलाह।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवास रजोदा गांव में मधुमक्खी हमला कैसे हुआ?
जवारा विसर्जन अनुष्ठान के दौरान कुएं में कूदे लोगों द्वारा उड़ी पानी की छींटें ऊपर पीपल के पेड़ पर बने बड़े मधुमक्खी छत्ते पर जा पड़ीं, जिससे मधुमक्खियाँ भड़क उठीं और उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों पर हमला कर दिया। यह घटना 20 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 9 बजे हुई।
जवारा विसर्जन क्या होता है?
जवारा विसर्जन एक पारंपरिक हिंदू अनुष्ठान है जिसमें नवरात्रि के दौरान उगाए गए जवारे (जौ के अंकुर) को जल में प्रवाहित किया जाता है। यह परंपरा मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रचलित है और इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होते हैं।
मधुमक्खी हमले में कितने लोग घायल हुए और उनकी क्या स्थिति है?
इस हमले में 20 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें से 11 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में भर्ती सभी लोगों की स्थिति पर चिकित्सा कर्मी नज़र रखे हुए हैं।
क्या देवास में पहले भी ऐसी घटना हुई थी?
हाँ, इससे पहले देवास जिले के ही सोनकच्छ क्षेत्र के अगेरा गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों ने हमला किया था, जिसमें लगभग 25 लोग घायल हुए और करीब 13 को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। यह एक महीने के भीतर जिले में दूसरी ऐसी घटना है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है?
प्रशासन ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि सामूहिक धार्मिक कार्यक्रमों से पहले आयोजन स्थल के आसपास मधुमक्खी छत्तों की जाँच की जाए और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें हटाया जाए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्थानीय प्रशासन को धार्मिक आयोजनों के लिए एक मानकीकृत सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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