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क्या आईआईटी दिल्ली ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को फंड देने की नई पहल की है?

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क्या आईआईटी दिल्ली ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को फंड देने की नई पहल की है?

सारांश

आईआईटी दिल्ली ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना का आगाज़ किया है। इस योजना के तहत 45 साल या उससे कम उम्र के शिक्षकों को वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे वे अपनी रिसर्च को और आगे बढ़ा सकें। जानिए इस पहल के बारे में और कैसे यह युवा प्रोफेसरों को लाभान्वित करेगा।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना बनाई है।
45 साल या उससे कम उम्र के प्रोफेसर को फंड और संसाधन मिलेंगे।
युवाओं को आंतरराष्ट्रीय अनुभव देने का मौका मिलेगा।
यह कार्यक्रम शिक्षा और रिसर्च को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करेगा।
इंडस्ट्री के साथ सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आईआईटी दिल्ली ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर्स अपनी रिसर्च के लिए वित्तीय और अन्य सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इस योजना का लाभ 45 साल या उससे कम उम्र के शिक्षकों को मिलेगा।

आईआईटी दिल्ली के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत रिसर्च के लिए अलग से फंड मुहैया कराया जाएगा। इस फंड का उपयोग नई मशीनें खरीदने, सॉफ्टवेयर लेने, प्रयोग करने, फील्ड में काम करने, प्रोटोटाइप बनाने या पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्चर रखने के लिए किया जा सकता है।

इसके अलावा, इंडस्ट्री और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि रिसर्च का लाभ सीधे जमीन पर पहुंचे और पेटेंट बनें तथा नई टेक्नोलॉजी का विकास हो सके। दरअसल, आईआईटी दिल्ली ने एक नया कार्यक्रम शुरू किया है जिसका नाम है दीपक राघवन फैमिली फाउंडेशन एक्सेलरेटर प्रोग्राम

इसका मकसद आईआईटी दिल्ली के युवा प्रोफेसरों को रिसर्च में आगे बढ़ने में सहायता करना है। इस कार्यक्रम के तहत 45 साल या उससे कम उम्र के शिक्षकों को 5 साल के लिए एंडोव्ड चेयर प्रोफेसर बनाया जाएगा। आईआईटी दिल्ली के अनुसार, ऐसे फैकल्टी को रिसर्च के लिए अलग से फंड और रिसर्च स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके साथ ही, उन्हें रिसर्च के लिए आवश्यक संसाधन भी प्रदान किए जाएंगे ताकि फैकल्टी बिना रुकावट अपनी रिसर्च कर सकें और पढ़ाई से जुड़ी अकादमिक जिम्मेदारियां भी निभा सकें। इतना ही नहीं, हर पांच साल में एक पूर्णतः फंडेड पीएचडी फेलोशिप भी दी जाएगी। पीएचडी फेलोशिप के छात्र चेयर प्रोफेसर के साथ मिलकर काम करेंगे और उन्हें भारत एवं विदेश में होने वाली कॉन्फ्रेंसों में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिल सकेगा।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी का मानना है कि आईआईटी दिल्ली में देश के बेहतरीन रिसर्चर हैं। ऐसे नए कार्यक्रम इन रिसर्चर्स को और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे भविष्य में भारत रिसर्च और इनोवेशन में आगे बना रहेगा।

कुल मिलाकर, यह पहल आईआईटी दिल्ली में रिसर्च को मजबूत करने, अच्छे अकादमिक लीडर तैयार करने और वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आईआईटी का कहना है कि यह कार्यक्रम डॉ. दीपक राघवन और आईआईटी दिल्ली एंडोमेंट मैनेजमेंट फाउंडेशन की साझा सोच का परिणाम है, जो शिक्षा और रिसर्च को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना चाहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह न केवल शिक्षकों को बल्कि देश के विकास को भी गति प्रदान करेगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
यह योजना 45 साल या उससे कम उम्र के प्रोफेसरों के लिए है।
फंड का उपयोग कैसे किया जा सकता है?
फंड का उपयोग नई मशीनें खरीदने, सॉफ्टवेयर लेने, प्रयोग करने और रिसर्च के लिए आवश्यक संसाधनों पर किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम का नाम क्या है?
इस कार्यक्रम का नाम दीपक राघवन फैमिली फाउंडेशन एक्सेलरेटर प्रोग्राम है।
क्या युवा प्रोफेसरों को रिसर्च के लिए सहायता मिलेगी?
हाँ, उन्हें रिसर्च के लिए अलग से फंड और रिसर्च स्टाफ मिलेगा।
क्या पीएचडी फेलोशिप की सुविधा है?
हाँ, हर पांच साल में पूर्णतः फंडेड पीएचडी फेलोशिप दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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