क्या स्कूलों में ‘स्थिरता’ का पाठ जरूरी है सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए?: आईआईटी मद्रास निदेशक

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क्या स्कूलों में ‘स्थिरता’ का पाठ जरूरी है सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए?: आईआईटी मद्रास निदेशक

सारांश

आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए स्कूलों में स्थिरता का पाठ अनिवार्य है। उन्होंने बच्चों को 5 साल की उम्र से स्थिरता सिखाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह शिक्षा भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

स्थिरता का पाठ बच्चों को ५ साल की उम्र से सिखाना चाहिए।
सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए शिक्षा का महत्व है।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नवाचार आवश्यक है।
टेक्नोलॉजी का सही उपयोग सतत विकास में सहायक हो सकता है।
स्कूलों में स्थिरता का पाठ आवश्यक है।

चेन्‍नई, २५ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (आईआईटी) मद्रास में 'आइडियाज टू इम्पैक्ट' (आई2आई) चैलेंज के दूसरे संस्करण का ग्रैंड फिनाले शनिवार को आयोजित हुआ। इस अवसर पर आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति के लिए स्कूलों में स्थिरता का पाठ आरंभ होना अत्यंत आवश्यक है।

कामकोटि ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि ५ वर्ष की आयु से बच्चों को स्थिरता के बारे में शिक्षा दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, "जब मैं स्कूलों को संबोधित करता हूं, तो मैं हमेशा कहता हूं कि ५ वर्ष की उम्र से ही बच्चों को स्थिरता के बारे में सिखाया जाना चाहिए, क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण है।"

उनका कहना था कि पृथ्वी वास्तव में खतरे में है और हमें उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जिन पर हमारा नियंत्रण है, जैसे संसाधनों का उपयोग, जीवन जीने का तरीका, और आदतें। जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति बहुत कठिन होगी। इसलिए, स्कूल स्तर पर स्थिरता का पाठ पढ़ाना आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि स्थिरता से जुड़े घटक सभी क्षेत्रों का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें शिक्षा, टेक्नोलॉजी और स्टार्ट-अप के साथ जोड़ना आवश्यक है।

कामकोटि ने आईआईटी मद्रास परिसर में आयोजित आई-टू-आई चैलेंज के बारे में भी चर्चा की, जहां देश भर के युवा नवप्रवर्तकों द्वारा विकसित ३८ पर्यावरण-नवाचारों का प्रदर्शन किया गया, जिसका उद्देश्य स्थिरता, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन को बढ़ावा देना था।

उन्होंने बताया कि जम्मू और अन्य क्षेत्रों में भारत भर में हमारी ३८ टीमें हैं। प्रत्येक टीम उत्कृष्ट परियोजनाओं के साथ आई है, जो विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्यों पर केंद्रित हैं।

कामकोटि ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रचारित १७ सतत विकास लक्ष्य हैं, जिनमें से लगभग सात या आठ लक्ष्यों पर यहाँ के प्रतिभागी ध्यान दे रहे हैं। वे ऐसे उत्पाद लेकर आए हैं जो संभावित रूप से प्रभावी समाधान साबित हो सकते हैं, जैसे कि कुछ अपशिष्ट पदार्थों का पुन: उपयोग या प्राकृतिक ऊर्जा का पुन: उपयोग।

उन्होंने कहा, "दुनिया भर में हर देश सतत विकास लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। १५० करोड़ या १.५ अरब की जनसंख्या वाले एक विशाल लोकतंत्र के रूप में, तकनीक ही एकमात्र उपाय है जिससे हम इन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए, उस तकनीक को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि शिक्षा का क्षेत्र हमारे समाज के भविष्य को आकार देता है। बच्चों को स्थिरता के महत्व के बारे में सिखाना केवल उनके लिए नहीं, बल्कि हमारे पूरे ग्रह के लिए आवश्यक है। जब हम तकनीक और शिक्षा को जोड़ते हैं, तो हम न केवल सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि एक बेहतर कल की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्थिरता का पाठ स्कूलों में जरूरी है?
हाँ, स्कूलों में स्थिरता का पाठ जरूरी है ताकि बच्चे बचपन से ही इसके महत्व को समझ सकें।
बच्चों को स्थिरता कब सिखाना चाहिए?
बच्चों को ५ वर्ष की उम्र से स्थिरता के बारे में सिखाना चाहिए।
सतत विकास लक्ष्यों के क्या फायदे हैं?
सतत विकास लक्ष्य हमें पर्यावरण की सुरक्षा और संसाधनों के उचित उपयोग के लिए मार्गदर्शन करते हैं।
आईआईटी मद्रास में क्या कार्यक्रम हुआ?
आईआईटी मद्रास में 'आइडियाज टू इम्पैक्ट' चैलेंज का ग्रैंड फिनाले हुआ, जिसमें ३८ पर्यावरण-नवाचारों का प्रदर्शन किया गया।
क्या तकनीक सतत विकास लक्ष्यों में मदद कर सकती है?
हाँ, तकनीक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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