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भारत-फ्रांस बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को मिली वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा

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भारत-फ्रांस बड़ा फैसला: भारतीय यात्रियों को मिली वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा

सारांश

भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब फ्रांस के हवाई अड्डों पर ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं होगी। फरवरी 2025 में मुंबई में मोदी-मैक्रों शिखर वार्ता में हुए समझौते को फ्रांस ने लागू किया। यह कदम भारत-फ्रांस 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।

मुख्य बातें

भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब फ्रांस के हवाई अड्डों पर ट्रांजिट के लिए अलग वीजा की जरूरत नहीं होगी।
यह सुविधा फरवरी 2025 में मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुए समझौते का परिणाम है।
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अप्रैल 2025 को इसकी आधिकारिक पुष्टि की।
यह कदम भारत-फ्रांस 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के तहत उठाया गया है, जो होराइजन 2047 विजन से जुड़ा है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पिछले सप्ताह पेरिस में फ्रांसीसी समकक्ष मार्टिन ब्रिएन्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
यह सुविधा केवल हवाई मार्ग से फ्रांस की मुख्य भूमि से गुजरने वाले भारतीय नागरिकों पर लागू होगी।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025। भारत ने फ्रांस द्वारा भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा लागू करने के ऐतिहासिक फैसले का गर्मजोशी से स्वागत किया है। अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को फ्रांस के किसी भी हवाई अड्डे से गुजरते समय अलग से ट्रांजिट वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फरवरी 2025 में मुंबई में हुई उच्चस्तरीय वार्ता का प्रत्यक्ष परिणाम है।

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार, 23 अप्रैल 2025 को मीडिया ब्रीफिंग में इस निर्णय की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि फ्रांस सरकार ने उस समझौते को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है, जिस पर फरवरी 2025 में मुंबई के लोक भवन में सहमति बनी थी।

जायसवाल ने अपने बयान में स्पष्ट किया, "फ्रांस की मुख्य भूमि से केवल हवाई मार्ग से आने-जाने वाले भारतीय नागरिकों को अब ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं होगी।" उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की भावना को मजबूत करता है।

मोदी-मैक्रों मुंबई शिखर वार्ता की पृष्ठभूमि

फरवरी 2025 में राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी और मुंबई की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों को 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक उन्नत किया था। यह एक ऐतिहासिक कदम था जिसने द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊंचाई का संकेत दिया।

उस शिखर बैठक में रक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्रों में एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया गया था, जो होराइजन 2047 विजन के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। ट्रांजिट वीजा की बाधा हटाना उसी रोडमैप की एक अहम कड़ी है।

भारतीय यात्रियों पर व्यावहारिक असर

अब तक भारतीय नागरिकों को फ्रांस के किसी एयरपोर्ट से कनेक्टिंग फ्लाइट लेते समय अलग से ट्रांजिट वीजा बनवाना पड़ता था, जो एक समय लेने वाली और खर्चीली प्रक्रिया थी। इस नई सुविधा से लाखों भारतीय यात्री, छात्र, व्यापारी और पर्यटक सीधे लाभान्वित होंगे जो यूरोप या अन्य देशों की यात्रा के लिए पेरिस के चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट का उपयोग करते हैं।

यह सुविधा विशेष रूप से उन भारतीय प्रवासियों के लिए राहत की खबर है जो यूरोप, अफ्रीका या अमेरिका जाते समय फ्रांस में ट्रांजिट करते हैं। अब उन्हें अतिरिक्त वीजा शुल्क और दूतावास की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।

भारत-फ्रांस कूटनीतिक संबंधों का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी 1998 से चली आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच राफेल लड़ाकू विमान सौदा, परमाणु ऊर्जा सहयोग और अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी ने रिश्तों को नई गहराई दी है।

इसी क्रम में पिछले सप्ताह विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पेरिस में फ्रांस के विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी जनरल मार्टिन ब्रिएन्स के साथ भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय वार्ता की सह-अध्यक्षता की, जो दर्शाता है कि दोनों देश कूटनीतिक गति को तेज बनाए हुए हैं।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो यूके, जर्मनी और UAE जैसे देश पहले से ही भारतीय पासपोर्ट धारकों को विभिन्न प्रकार की वीजा सुविधाएं देते आए हैं। फ्रांस का यह कदम उस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है और संकेत देता है कि भारत की बढ़ती वैश्विक साख के चलते यूरोपीय देश भी अपनी नीतियां बदल रहे हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य यूरोपीय देश भी इसी तरह की सुविधाएं भारतीय नागरिकों को देने की दिशा में कदम उठाते हैं, और होराइजन 2047 विजन के तहत भारत-फ्रांस साझेदारी के अगले चरण में कौन से नए समझौते सामने आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक मंच पर भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि यह सुविधा उसी मोदी-मैक्रों बैठक का नतीजा है जिसमें भारत-फ्रांस संबंधों को 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा मिला — यानी कूटनीति का सीधा फायदा आम भारतीय यात्री तक पहुंच रहा है। यह प्रश्न भी उठता है कि जब फ्रांस जैसा देश इतनी तेजी से समझौते लागू करता है, तो अन्य यूरोपीय देश कब तक भारतीय पासपोर्ट के प्रति अपनी कठोर वीजा नीतियां बनाए रखेंगे? यह घटनाक्रम भारत की बदलती वैश्विक स्थिति का प्रतिबिंब है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अब भारतीयों को फ्रांस में ट्रांजिट के लिए वीजा नहीं चाहिए?
हां, अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को फ्रांस की मुख्य भूमि के हवाई अड्डों से केवल हवाई मार्ग द्वारा ट्रांजिट करते समय अलग से ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी। फ्रांस सरकार ने यह सुविधा 23 अप्रैल 2025 को आधिकारिक रूप से लागू कर दी है।
भारत-फ्रांस वीजा-फ्री ट्रांजिट समझौता कब और कहां हुआ था?
यह समझौता फरवरी 2025 में मुंबई के लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान हुआ था। उसी बैठक में दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया था।
वीजा-फ्री ट्रांजिट से किन भारतीयों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
इस सुविधा से वे भारतीय यात्री, छात्र, व्यापारी और प्रवासी सबसे अधिक लाभान्वित होंगे जो यूरोप, अफ्रीका या अन्य देशों की यात्रा के लिए पेरिस के चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट का उपयोग कनेक्टिंग फ्लाइट के रूप में करते हैं। अब उन्हें अतिरिक्त वीजा शुल्क और दूतावास प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
भारत-फ्रांस स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप क्या है?
यह फरवरी 2025 में मोदी-मैक्रों शिखर बैठक में घोषित एक उन्नत द्विपक्षीय साझेदारी का दर्जा है। इसके तहत दोनों देश रक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य और होराइजन 2047 विजन के अंतर्गत गहरे सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री की पेरिस यात्रा का क्या महत्व है?
पिछले सप्ताह विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पेरिस में फ्रांस के विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी जनरल मार्टिन ब्रिएन्स के साथ भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय वार्ता की सह-अध्यक्षता की। यह यात्रा दर्शाती है कि दोनों देश कूटनीतिक संवाद और समझौतों के क्रियान्वयन की गति को तेज बनाए हुए हैं।
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