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क्या इंडिगो की कहानी का पर्दाफाश होना चाहिए? चर्चा क्यों जरूरी है: गौरव गोगोई

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क्या इंडिगो की कहानी का पर्दाफाश होना चाहिए? चर्चा क्यों जरूरी है: गौरव गोगोई

सारांश

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इंडिगो मामले में सरकार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ मंत्री के बयान से सरकार नहीं बच सकती और इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। इस लेख में जानें क्यों सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद ने सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।
हजारों उड़ानें रद्द हुईं, यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सरकार ने डीजीसीए की भूमिका को नकारा।
पायलटों के लिए नए कानून को वापस लिया गया।
बड़े मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 9 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मंगलवार को इंडिगो मामले में केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि केवल मंत्री के बयानों से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके पीछे की कहानी का पर्दाफाश होना चाहिए और संसद में इस पर चर्चा आवश्यक है।

गोगोई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले दो दिनों में सरकार की ओर से राज्यसभा और लोकसभा में कई बयान दिए गए हैं। सरकार ने सारी जिम्मेदारी निजी कंपनी के मालिक पर डाल दी है, मानो उनकी खुद की कोई जिम्मेदारी न हो। ऐसा प्रतीत होता है जैसे डीजीसीए की कोई भूमिका ही नहीं है। हजारों उड़ानें रद्द हुईं, हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर बेहद खराब हालात का सामना करना पड़ा और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। पायलटों के लिए लाए गए नए कानून को सरकार ने वापस ले लिया। न तो पायलटों को राहत मिली, न यात्रियों को, और न ही सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की। कंपनी के मालिक को सिर्फ एक नोटिस सौंपा गया। सरकार यही समझती है कि उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई है।

उन्होंने आगे कहा कि जब लोकसभा में मंत्री का बयान आया, तो पूरा विपक्ष असहमत था, इसलिए वॉकआउट किया गया। हमारी मांग स्पष्ट है कि सरकार इस मामले से भाग नहीं सकती। मंत्री के बयान से वह जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। पिछले सप्ताह में कितनी उड़ानें रद्द हुईं, यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है, इसके पीछे की पूरी कहानी का पर्दाफाश होना चाहिए। एविएशन इंडस्ट्री पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। सरकार कहती है कि एविएशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन तेजी से बढ़ते मार्केट का क्या फायदा जब एयरपोर्ट पर चाय 200 रुपए की हो, टिकट 20-25 हजार रुपए का हो, पायलटों और ग्राउंड स्टाफ की हालत खराब हो और पूरी इंडस्ट्री दो निजी कंपनियों के हाथ की कठपुतली बन गई हो।

सांसद फौजिया खान ने कहा कि वे नोटिस भेजेंगे, लेकिन क्या सारी गलती सिर्फ इंडिगो की है? क्या सरकार की कोई गलती नहीं है? सरकार द्वारा लागू किए गए रेगुलेशन क्या गड़बड़ नहीं थे? अचानक पूरी व्यवस्था कैसे ठप हो गई? जो रेगुलेशन वापस लिए गए हैं, उनकी सच्चाई क्या है?

वहीं, वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के बारे में जो भी कहें, कौन मानने वाला है? इतिहास गवाह है कि पंडित नेहरू ने क्या-क्या किया। ‘वंदे मातरम’ का जिक्र आज कौन कर रहा है? आजादी की लड़ाई के समय ये लोग कहाँ थे?

कांग्रेस नेता किरण कुमार चमाला ने सोनिया गांधी को नोटिस जारी करने पर कहा कि वे बार-बार सोनिया गांधी और उनके परिवार को निशाना बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चुनाव सुधारों पर चर्चा आखिरकार दो सत्रों की मांग के बाद हुई। हमारे नेता बता रहे हैं कि बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल आदि राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया कैसे चल रही है। एसआईआर के प्रावधान सीमित हैं और इसे केवल आवश्यकता पड़ने पर लागू करना चाहिए, लेकिन कुछ वोटों के फायदे के लिए इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी। केवल बयान देने से कोई समाधान नहीं निकलता। एविएशन इंडस्ट्री में हो रही समस्याओं पर चर्चा आवश्यक है और यह दर्शाता है कि सरकार को नागरिकों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिगो मामले में सरकार की भूमिका क्या है?
सरकार ने पूरी जिम्मेदारी निजी कंपनी के मालिक पर डाल दी है, जबकि उनकी अपनी भी जिम्मेदारी है।
क्या विपक्ष ने इस मामले पर कोई कार्रवाई की है?
हां, विपक्ष ने मंत्री के बयान के खिलाफ वॉकआउट किया है।
पायलटों के लिए नए कानून का क्या हुआ?
सरकार ने पायलटों के लिए जो नया कानून लाया था, उसे वापस ले लिया।
इस मामले पर चर्चा क्यों जरूरी है?
इस पर चर्चा होने से सरकार को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होगा और समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी।
क्या इंडिगो की समस्याएं सिर्फ एक कंपनी तक सीमित हैं?
नहीं, यह पूरी एविएशन इंडस्ट्री की समस्याओं का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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