क्या इंदौर में गंदे पानी की आपूर्ति का खुलासा पहले ही हुआ था?

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क्या इंदौर में गंदे पानी की आपूर्ति का खुलासा पहले ही हुआ था?

सारांश

क्या इंदौर में गंदे पानी की आपूर्ति का मामला गंभीर है? नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 2019 में कैग की रिपोर्ट का हवाला देकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानें इस मामले की पूरी सच्चाई।

Key Takeaways

  • कैग की रिपोर्ट में गंदे पानी की आपूर्ति का खुलासा हुआ था।
  • इंदौर में 15 लोगों की जान गई है।
  • सरकार ने समस्या का समाधान नहीं किया है।
  • पानी का नियमित ऑडिट नहीं हो रहा है।
  • 470 करोड़ रुपये का बकाया है।

भोपाल, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर में गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 2019 में ही कैग की रिपोर्ट में इंदौर और भोपाल में गंदे पानी की आपूर्ति का जिक्र किया गया था, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज किया।

सिंघार ने एक बयान में कहा कि इंदौर में गंदा पानी पीने के कारण अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। कैग ने 2019 में इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति का उल्लेख किया था और इसे सुधारने के लिए सुझाव भी दिए थे।

उमंग सिंघार ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक से चार बड़े शहरों, जैसे कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में पानी के प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर (लगभग 906.4 करोड़ रुपये) का कर्ज लिया था। इसका उद्देश्य शहरों में पानी की आपूर्ति में सुधार और गुणवत्ता बढ़ाना था।

उन्होंने कहा, "कर्ज लेने के लगभग 15 साल बाद, कैग ने 2019 में भोपाल और इंदौर के पानी प्रबंधन पर एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में दोनों शहरों में गंभीर कमियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया गया। प्रोजेक्ट का काम अपर्याप्त पाया गया। रिपोर्ट के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।"

सिंघार ने कहा कि कैग की रिपोर्ट ने सवाल उठाया कि इंदौर में केवल चार जोनों और भोपाल में पाँच जोनों में ही रोजाना पानी पहुंचाया जाता है। दोनों शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से सिर्फ 5.30 लाख को नल कनेक्शन प्राप्त हुए हैं। 2013 से 2018 के बीच 4,481 पानी के नमूने (भौतिक, रासायनिक और जीवाणु परीक्षण वाले) पीने योग्य नहीं पाए गए।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि स्वतंत्र जांच में 54 नमूनों में से 10 खराब पाए गए, जिनमें गंदगी और मल था। इससे भोपाल के 3.62 लाख और इंदौर के 5.33 लाख लोगों को गंदा पानी मिला। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने 5.45 लाख जल-जनित बीमारियों के मामले दर्ज किए। गैर-राजस्व पानी 30 से 70 प्रतिशत तक है।

किसी को नहीं पता कि यह पानी कहाँ जा रहा है। पानी का नियमित ऑडिट न होने पर बर्बादी कैसे पता चलेगी? पानी के टैरिफ की वसूली नहीं हो रही है, और दोनों शहरों पर 470 करोड़ रुपये का बकाया है।

Point of View

बल्कि यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
NationPress
03/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या कैग की रिपोर्ट में इंदौर में गंदे पानी की आपूर्ति का जिक्र है?
जी हाँ, कैग की रिपोर्ट में 2019 में इंदौर और भोपाल में गंदे पानी की आपूर्ति का खुलासा किया गया था।
मुख्यमंत्री ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
गंदे पानी की आपूर्ति से कितने लोगों की जान गई है?
इंदौर में गंदा पानी पीने के कारण अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है।
क्या सरकार ने पहले इस मुद्दे पर ध्यान दिया था?
सरकार ने 2019 में कैग की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया।
क्या इंदौर में पानी का नियमित ऑडिट होता है?
नहीं, पानी का नियमित ऑडिट नहीं होने के कारण बर्बादी का पता नहीं चल पाता।
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