आईएसएसएआर 2025: अंतरिक्ष युग में मलबे की चुनौतियों के साथ सबसे व्यस्त वर्ष
सारांश
Key Takeaways
- 328 अंतरिक्ष प्रक्षेपण, 315 सफल मिशन
- 4,651 नवीन पिंडों का प्रक्षेपण
- राइडशेयर मिशनों की महत्वपूर्ण भूमिका
- 2025 में कोई बड़ी विखंडन घटना नहीं
- अंतरिक्ष मलबे की स्थिति पर चिंता
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट 2025 (आईएसएसएआर-2025) ने अंतरिक्ष गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 अंतरिक्ष युग के आरंभ के बाद सबसे व्यस्त वर्ष साबित हुआ।
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2025 में विश्व स्तर पर कुल 328 अंतरिक्ष प्रक्षेपण किए गए, जिनमें से 315 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इन अभियानों के माध्यम से 4,198 सक्रिय उपग्रहों सहित कुल 4,651 नवीन अंतरिक्ष पिंडों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित किया गया। अंतरिक्ष गतिविधियों में यह वृद्धि पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 254 प्रक्षेपणों द्वारा 2,963 पिंड अंतरिक्ष में भेजे गए थे, जबकि 2023 में 212 प्रक्षेपणों के जरिए यह संख्या 3,135 थी। इस प्रकार, वर्ष 2025 में अंतरिक्ष पिंडों की संख्या में लगभग 74.5 प्रतिशत की अभूतपूर्व वार्षिक वृद्धि देखने को मिली है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रिकॉर्ड वृद्धि का मुख्य कारण राइडशेयर लॉन्च मिशन थे। ट्रांसपोर्टर 12, 13, 14 और 15 मिशनों (14 जनवरी, 15 मार्च, 2 जून और 28 नवंबर) में आमतौर पर 70 से अधिक पेलोड शामिल किए गए। सबसे अधिक 28 नवंबर को 140 पेलोड लॉन्च किए गए। 28 अप्रैल 2025 को स्टारलिंक के दो बैच एक साथ लॉन्च हुए। सोयुज-2.1बी ने 28 दिसंबर को 52 पेलोड भेजे। स्टारलिंक के कुल 10,749 सैटेलाइट्स में से 9,396 अभी भी कक्षा में हैं, जबकि 1,353 फिर से प्रवेश कर चुके हैं।
हालांकि, अंतरिक्ष मलबे की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई है। वर्ष 2025 में कुल 1,911 वस्तुएं वायुमंडल में फिर से प्रवेश कर गईं। इनमें 1,002 ज्ञात अंतरिक्ष यान, 657 मलबा वस्तुएं, 108 रॉकेट पिंड और 144 अज्ञात वस्तुएं शामिल थीं। अच्छी बात यह है कि 2025 में कक्षा में कोई बड़ी विखंडन घटना नहीं हुई। चंद्र अन्वेषण में निजी कंपनियों की रुचि भी बढ़ी है। 2025 में चंद्रमा पर चार निजी मिशन लॉन्च किए गए, जिसमें ब्लू घोस्ट मिशन 1 ने चंद्रमा पर पहली निजी सॉफ्ट लैंडिंग का रिकॉर्ड बनाया।
अंतरिक्ष की निचली कक्षा में बढ़ती भीड़भाड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंतरिक्ष में निकटवर्ती उपग्रहों के लगभग 1,60,000 अलर्ट मिले हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में सक्रिय उपग्रहों की संख्या अंतरिक्ष मलबे से अधिक हो सकती है, जिससे स्पेस ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौतियां और बढ़ जाएंगी। इनमें जीएसएलवी-एफ15/एनवीएस-02, पीएसएलवी-सी61/ईओएस-9, जीएसएलवी-एफ16/एनआईएसएआर, एलवीएम-एम5/सीएमएस-03 और एलवीएम-एम6/ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 शामिल हैं। जीएसएलवी-एफ15 भारतीय प्रक्षेपण यान का 100वां प्रक्षेपण था।
वहीं, नासा-इसरो का संयुक्त मिशन एनआईएसएआर 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। सीएमएस-03 को भी सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। हालाँकि, पीएसएलवी-सी61 में तीसरे चरण की समस्या के कारण ईओएस-9 कक्षा में नहीं पहुँच सका। कुल मिलाकर 2025 में 8 भारतीय उपग्रह कक्षा में स्थापित हुए।