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जबलपुर: जल संकट की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने लिया सख्त कदम

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जबलपुर: जल संकट की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने लिया सख्त कदम

सारांश

जबलपुर में जल संकट के चलते जिला प्रशासन ने पूरे जिले को जल-संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। इससे पेयजल के वितरण में सुधार होगा और संकट को टाला जा सकेगा।

मुख्य बातें

जल-संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
सभी जल स्रोतों को आवश्यक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है।
भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण लगाया गया है।
जल संरक्षण की महत्वता पर जोर दिया गया है।
आपात स्थिति में निजी जल स्रोतों का अधिग्रहण किया जा सकता है।

जबलपुर, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी से बढ़ती समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जबलपुर जिला प्रशासन ने जिले को ३० जून तक 'जल-संकटग्रस्त क्षेत्र' घोषित करने का निर्णय लिया है।

जिला मजिस्ट्रेट राघवेंद्र सिंह ने शुक्रवार को जारी एक अधिसूचना में कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पेयजल का समान वितरण सुनिश्चित करना और संकट को और बढ़ने से रोकना है।

प्रशासन ने बताया कि यह घोषणा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल का समान वितरण सुनिश्चित करने और ग्रीष्म ऋतु के दौरान जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की गई है।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक जल का दोहन भूजल स्तर को तेजी से गिरा रहा है। ट्यूबवेल और अन्य जल स्रोतों पर दबाव बढ़ने से आने वाले हफ्तों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए, प्रशासन ने सभी प्रमुख जल स्रोतों को केवल पेयजल और घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित कर दिया है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी नदियां, नाले, बांध और सार्वजनिक जल स्रोत केवल आवश्यक उपयोग के लिए आरक्षित किए गए हैं। बिना अनुमति के किसी भी गैर-आवश्यक उपयोग पर प्रतिबंध लागू किया गया है।

भूजल दोहन पर भी सख्त नियंत्रण लागू किया गया है। आदेश में कहा गया है कि बिना पूर्व अनुमति के कोई भी व्यक्ति नया ट्यूबवेल नहीं बनाएगा। ड्रिलिंग आवेदनों की जांच उचित सत्यापन के बाद उप-मंडल राजस्व अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

अधिकारियों ने उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह आदेश मध्य प्रदेश पेयजल संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत लागू किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जाएगी।

प्रशासन ने आपातकालीन प्रावधान भी शामिल किए हैं। आदेश में कहा गया है कि यदि सार्वजनिक जल स्रोत सूख जाते हैं, तो आपूर्ति बनाए रखने के लिए निजी जल स्रोतों का अस्थायी रूप से अधिग्रहण किया जा सकता है। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि किसी भी क्षेत्र में जल की पूर्ण कमी न हो।

जिले के कई हिस्सों में अनियमित जल आपूर्ति की खबरों के बीच यह कदम उठाया गया है। बढ़ते तापमान के कारण पानी की मांग में भारी वृद्धि हुई है।

प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि इस स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आने वाले संकटों को भी टालने में मदद करेगा। यह स्थिति सभी नागरिकों के लिए चिंता का विषय है, और जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर में जल संकट की वजह क्या है?
जबलपुर में जल संकट का मुख्य कारण अत्यधिक गर्मी और जल का अधिक दोहन है, जिससे भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।
जिला प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
जिला प्रशासन ने जिले को जल-संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है और सभी जल स्रोतों को केवल आवश्यक उपयोग के लिए आरक्षित कर दिया है।
क्या जल संरक्षण की अपील की गई है?
हाँ, प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील की है और जल संरक्षण को आवश्यक बताया है।
क्या नए ट्यूबवेल बनाने पर रोक है?
हाँ, बिना पूर्व अनुमति के कोई भी व्यक्ति नया ट्यूबवेल नहीं बना सकता।
अगर सार्वजनिक जल स्रोत सूख जाएं तो क्या होगा?
यदि सार्वजनिक जल स्रोत सूख जाते हैं, तो प्रशासन निजी जल स्रोतों का अस्थायी अधिग्रहण कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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