क्या जालंधर अदालत ने पूर्व दिल्ली सीएम आतिशी के विवादास्पद वीडियो को हटाने का आदेश दिया?

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क्या जालंधर अदालत ने पूर्व दिल्ली सीएम आतिशी के विवादास्पद वीडियो को हटाने का आदेश दिया?

सारांश

जालंधर अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के विवादास्पद वीडियो को हटाने का आदेश दिया। क्या यह वीडियो सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा रहा था? जानिए पूरी कहानी और अदालत के फैसले के पीछे के कारण।

Key Takeaways

  • जालंधर अदालत ने विवादित वीडियो को हटाने का आदेश दिया है।
  • वीडियो को सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए छेड़छाड़ किया गया था।
  • कपिल मिश्रा द्वारा साझा किया गया वीडियो अब ब्लॉक किया जाएगा।
  • अदालत ने 24 घंटों में सामग्री हटाने का निर्देश दिया।
  • मुख्यमंत्री ने इसे साजिश करार दिया।

जालंधर, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब के जालंधर की एक अदालत ने गुरुवार को दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी द्वारा प्रस्तुत एक 'छेड़छाड़ किए गए' वीडियो को हटाने और ब्लॉक करने का आदेश दिया। यह वीडियो दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा साझा किया गया था।

वीडियो क्लिप में उन्हें नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के संदर्भ में विवादास्पद टिप्पणी करते हुए दिखाया गया। इसे सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न करने के लिए डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया गया पाया गया।

साइबर अपराध पुलिस द्वारा दायर आवेदन पर कार्यवाही करते हुए, जालंधर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने कहा कि इस वीडियो का प्रसार राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा उत्पन्न करता है। अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के नियम 3 (डी) का उल्लेख करते हुए मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), एक्स और टेलीग्राम को यह निर्देश

अदालत ने कहा, "कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल और किसी भी हालत में अदालत के आदेश की प्राप्ति के 24 घंटों के भीतर हटाने का निर्देश दिया जाता है।" इसके साथ ही अदालत ने 10 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने मीडिया को बताया कि जालंधर अदालत ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कपिल मिश्रा ने एक फर्जी वीडियो जारी कर गुरुओं का अपमान किया था।

उन्होंने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा साझा किया गया वीडियो छेड़छाड़ किया हुआ पाया गया था।

पिछले सप्ताह जालंधर पुलिस कमिश्नरेट ने कहा कि इकबाल सिंह की शिकायत पर आतिशी के संपादित और छेड़छाड़ किए गए वीडियो को अपलोड करने के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है।

सोशल मीडिया पर कई पोस्ट अपलोड किए गए हैं जिनमें एक छोटा वीडियो क्लिप है, जिसमें कथित तौर पर दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी सिख गुरुओं के खिलाफ अपमानजनक और ईशनिंदा वाली टिप्पणियां करती हुई दिखाई दे रही हैं। इन पोस्ट के साथ भड़काऊ कैप्शन भी दिए गए हैं।

जालंधर पुलिस आयुक्त कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा था कि जांच वैज्ञानिक तरीके से की गई है और आतिशी की आवाज वाला वीडियो क्लिप कपिल मिश्रा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से डाउनलोड किया गया था और फोरेंसिक जांच के लिए मोहाली स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक को भेजा गया था।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी आतिशी के विधानसभा वीडियो के साथ 'छेड़छाड़' को लेकर भाजपा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'पंजाब में सांप्रदायिक अशांति भड़काने की एक सोची-समझी साजिश' बताया था।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि धर्मनिरपेक्ष पंजाब सरकार इस तरह के राजनीतिक हथकंडों को सफल नहीं होने देगी और वीडियो को गलत सबटाइटल के साथ पोस्ट किया गया था, जो 'बेअदबी' (अपवित्रता) का कृत्य है। फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट रूप से साबित हो गया है कि आतिशी ने 'गुरु' शब्द का प्रयोग नहीं किया था।

Point of View

बल्कि यह राजनीतिक और धार्मिक संवेदनाओं के बीच की बारीकियों को भी उजागर करता है। अदालत का निर्णय यह दर्शाता है कि न्याय प्रणाली किसी भी प्रकार के भड़काऊ सामग्री के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

जालंधर अदालत ने वीडियो को हटाने का आदेश क्यों दिया?
अदालत ने कहा कि वीडियो का प्रसार सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा है।
कौन सा वीडियो विवादास्पद माना गया?
यह वीडियो दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी का है, जिसमें उन्हें गुरु तेग बहादुर के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करते हुए दिखाया गया।
कपिल मिश्रा का इस मामले में क्या रोल है?
कपिल मिश्रा ने इस विवादास्पद वीडियो को साझा किया था, जिसके कारण यह मामला अदालत तक पहुंचा।
क्या पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई की?
हाँ, जालंधर पुलिस ने इस वीडियो को लेकर एफआईआर दर्ज की है।
क्या मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस मामले पर कोई टिप्पणी की?
जी हाँ, उन्होंने इसे पंजाब में सांप्रदायिक अशांति भड़काने की एक सोची-समझी साजिश बताया।
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