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क्या जम्मू-कश्मीर में जनवरी में बारिश में 96 प्रतिशत की कमी आई?

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क्या जम्मू-कश्मीर में जनवरी में बारिश में 96 प्रतिशत की कमी आई?

सारांश

जम्मू-कश्मीर में जनवरी के पहले पखवाड़े में बारिश में रिकॉर्ड कमी देखने को मिली है। न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला गया है। इस स्थिति के चलते बागवानी और कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। जानें इस विषय में विस्तार से।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर में जनवरी में 96 प्रतिशत बारिश की कमी हुई है।
न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला गया है।
फलों के पेड़ों में समय से पहले फूल आने की संभावना है।
कृषि और बागवानी क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम विभाग ने बर्फबारी की संभावना जताई है।

श्रीनगर, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर में जनवरी के पहले पखवाड़े में 96 प्रतिशत बारिश की कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप रविवार को घाटी में न्यूनतम तापमान फिर से शून्य से कई डिग्री नीचे चला गया।

मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में जम्मू और कश्मीर में 96 प्रतिशत बारिश की कमी चिंताजनक है, क्योंकि इससे पेड़ों में समय से पहले फूल आने की संभावना है। इससे फरवरी और मार्च में कम तापमान के कारण फल नहीं बन पाएंगे।

फलों के पेड़ों में समय से पहले फूल आना घाटी के फसल उगाने वालों के लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है। यदि जल्द ही बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो कृषि और बागवानी क्षेत्र हाल के वर्षों में सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

आम धारणा के विपरीत, कश्मीर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बागवानी है, न कि पर्यटन।

'चिल्लई कलां' नाम का 40 दिन का कड़ाके की ठंड का मौसम 30 जनवरी को समाप्त होगा। यदि जम्मू और कश्मीर में बड़े पैमाने पर बर्फबारी नहीं होती है, तो गर्मी के मौसम में पीने के पानी, खेती और बागवानी की सिंचाई के लिए पानी की कमी हो सकती है।

मौसम विभाग ने 22 से 24 जनवरी के बीच ऊंचे इलाकों और घाटी के मैदानी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा, "22 से 24 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेगा। इससे जम्मू और कश्मीर में बारिश/बर्फबारी होने की उम्मीद है, और घाटी के मैदानी क्षेत्रों में इस मौसम की पहली बर्फबारी होने की संभावना है।"

अब तक घाटी में कोई बड़ी बर्फबारी नहीं हुई है। श्रीनगर शहर और अन्य मैदानी इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी अब भी बाकी है।

स्थानीय लोगों की सारी उम्मीदें अब इसी पूर्वानुमान पर टिकी हैं। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 4.7 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में माइनस 5.6 डिग्री सेल्सियस और पहलगाम में माइनस 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस, कटरा शहर में 6.6 डिग्री सेल्सियस, बटोटे में 3.7 डिग्री सेल्सियस, बनिहाल में माइनस 2.4 डिग्री सेल्सियस और भद्रवाह में माइनस 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

शनिवार को जम्मू में अधिकतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस और श्रीनगर में 11.2 डिग्री सेल्सियस था।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्थानीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से कृषि और बागवानी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में, यह आवश्यक है कि सरकार और संबंधित निकाय इस स्थिति का समाधान निकालें।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में बारिश की कमी का क्या कारण है?
जम्मू-कश्मीर में बारिश की कमी का कारण मौसमी बदलाव और जलवायु परिवर्तन हो सकता है।
क्या इससे फसल पर प्रभाव पड़ेगा?
हाँ, बारिश की कमी से फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या बर्फबारी की संभावना है?
मौसम विभाग ने 22 से 24 जनवरी के बीच बर्फबारी की संभावना जताई है।
इससे स्थानीय लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इससे स्थानीय लोगों को पानी और फसल के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या कश्मीर की अर्थव्यवस्था सिर्फ पर्यटन पर निर्भर है?
नहीं, कश्मीर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बागवानी है।
राष्ट्र प्रेस
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