क्या 'जन नायकन' विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को राहत देने से किया इनकार?
सारांश
Key Takeaways
- फिल्म 'जन नायकन' को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय विवादित है।
- मद्रास हाईकोर्ट में 20 जनवरी को मामले की सुनवाई होगी।
- निर्माताओं ने यू/ए सर्टिफिकेट के लिए सभी संशोधन किए।
- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
- फिल्म की रिलीज की तारीख अभी अनिश्चित है।
मुंबई, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की आगामी फिल्म 'जन नायकन' को लेकर विवाद का सिलसिला जारी है। यह फिल्म उनके करियर की अंतिम फिल्म मानी जा रही है और इसे प्रदर्शित कराने के लिए प्रोडक्शन टीम नित नए प्रयास कर रही है।
फिल्म की रिलीज और सेंसर सर्टिफिकेट से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को राहत देने से साफ-साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि मद्रास हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर 20 जनवरी को अंतिम निर्णय ले।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑग्स्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे उच्च न्यायालय के समक्ष ही निपटाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट मामले की सुनवाई कर पूरी तरह से न्यायसंगत फैसला सुनाए। इस आदेश के साथ ही फिल्म निर्माताओं और विजय के प्रशंसकों के लिए रिलीज की राह फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।
'जन नायकन' के प्रोड्यूसर केवीएन प्रोडक्शंस ने फिल्म को दिसंबर 2025 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के पास प्रस्तुत किया था। बोर्ड ने प्रारंभिक जांच में कुछ कट्स और डायलॉग्स को म्यूट करने की सिफारिश की। निर्माताओं ने सभी बदलाव किए और फिल्म को दोबारा बोर्ड के पास भेजा। इस बार बोर्ड ने रिव्यू करने के बाद फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की।
इस बीच कुछ शिकायतें आईं, जिसमें कहा गया कि फिल्म धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। इसके कारण सीबीएफसी ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया। निर्माताओं ने इसे चुनौती दी और यह मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा।
9 जनवरी 2026 को मद्रास हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फिल्म को तत्काल यू/ए सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया, लेकिन उसी दिन डिवीजन बेंच ने आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि बोर्ड को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिला। इसके चलते फिल्म की 9 जनवरी को होने वाली रिलीज स्थगित कर दी गई।
निर्माताओं ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में विशेष लीव पिटीशन दायर की। पिटीशन में उन्होंने डिवीजन बेंच के आदेश को चुनौती दी और फिल्म की रिलीज के लिए राहत मांगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को सीधे राहत नहीं दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले को हाईकोर्ट में ही निपटाया जाए और 20 जनवरी को सुनवाई के लिए निर्धारित किया।