क्या आंख दिखाओ, सबका इलाज होगा? मौलाना मदनी के विवादित बयान पर जदयू प्रवक्ता का जवाब
सारांश
Key Takeaways
- न्यायपालिका की ताकत पर जोर
- राजनीतिक बयानों का प्रभाव
- देश में कानून का पालन होना चाहिए
- सकारात्मक राजनीति की आवश्यकता
- प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की सराहना
पटना, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी द्वारा 'जिहाद' पर दिए गए विवादित बयान का उत्तर दिया है। उन्होंने कहा कि जब देश में न्यायपालिका मौजूद है, तो कौन आंख उठा सकता है? जो भी आंख उठाएगा, उनका इलाज किया जाएगा।
नीरज कुमार ने रविवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "'जिहाद' शब्द उनके (महमूद मदनी) शब्दकोश का हो सकता है, लेकिन इस देश के हर धार्मिक समूह और संविधान की प्रति आदर का भाव होना चाहिए। देश में कार्यपालिका, विधायका और न्यायपालिका है, और जो भी किसी को दबाने की कोशिश करेगा, उसके लिए सजा का प्रावधान है।"
उन्होंने आगे कहा, "महमूद मदनी ने ऐसा क्यों कहा, यह उन्हें ही पता है, लेकिन हर अपराध के लिए न्यायपालिका देश में मौजूद है। जब न्यायपालिका है, तो कौन आंख उठा सकता है?"
जदयू प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "आज 'मन की बात' कार्यक्रम का 128वां एपिसोड है। इस कार्यक्रम में देश के मूलभूत मुद्दों पर, सफलताओं की कहानियों पर चर्चा होती है और नई पीढ़ी के साथ संवाद किया जाता है।"
उन्होंने जनता से अपील की कि लोग 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की बातों पर गंभीरता से विचार करें और अपने देश के भविष्य में अपनी भूमिका निभाएं।
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले सर्वदलीय बैठक पर नीरज कुमार ने कहा कि यह संसदीय परंपरा का हिस्सा है। महत्वपूर्ण यह है कि विपक्ष 'हिट एंड रन' की स्थिति पर क्यों कायम रहता है?
ओपोज़िशन को एसआईआर के मुद्दे पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब उनके समय एसआईआर हुआ, तब उन्हें यह असंवैधानिक नहीं लगा। अब जब जनता ने जनादेश दिया है, तब ओपोज़िशन ने इसे स्वीकार नहीं किया है।
उन्होंने कहा, "हारते-हारते राजनीति की कमर टूट चुकी है, लेकिन इनकी ऐंठन नहीं गई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि, उम्मीद है कि विपक्ष सकारात्मक रुख अपनाएगा।"
चुनाव आयोग की तरफ से बीएलओ की सैलरी बढ़ाने के फैसले पर जदयू प्रवक्ता ने कहा, "चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इस प्रकार के फैसले उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। बीएलओ की मतदाता सूची से लेकर पूरी चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सच यह है कि जो लोग आलोचना करते हैं, उनके पास मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट भी नहीं होते।"