क्या जदयू ने लालू यादव को सरकारी आवास छोड़ने की सलाह दी?
सारांश
Key Takeaways
- राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश मिला है।
- जदयू ने लालू यादव को मोहमाया त्यागने की सलाह दी है।
- विपक्ष इसे बदले की कार्रवाई मान रहा है।
- लालू यादव की पुत्री ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
- राजद ने इसे भाजपा सरकार के हस्तक्षेप के रूप में देखा है।
पटना, 26 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड पर स्थित आवास को खाली करने का आदेश मिलने के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे बदले की कार्रवाई मान रहा है, वहीं जदयू ने राजद अध्यक्ष लालू यादव को मोहमाया त्यागने की सलाह दी है।
जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू यादव अब अपने जीवन के चौथे चरण में माया के जाल में फंस गए हैं। परिवार की माया ने उन्हें न्यायपालिका तक पहुंचा दिया और संपत्ति की माया के कारण वे जेल भी गए। अब सरकारी बंगले की माया उन्हें घेर रही है।
उन्होंने सलाह देते हुए कहा, "लालू यादव, मोह-माया जैसी चीजों से ऊपर उठकर आगे बढ़िए। आपने संपत्ति की एक शानदार विरासत बनाई है। पार्टी को पीछे छोड़ दिया है। ऐसी स्थिति में, जिस मकान में आप बीमार पड़े, वहां से निकलकर सरकार के आदेश का पालन करें।"
दरअसल, बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने मंगलवार शाम को राबड़ी देवी को उनका सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है। उन्हें अब 39 हार्डिंग पार्क आवंटित किया गया है।
इस आदेश के बाद, लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सुशासन बाबू का विकास मॉडल। करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव का अपमान करना पहली प्राथमिकता है। घर से निकालने की बात की जा रही है, लेकिन बिहार की जनता के दिल से कैसे निकालेंगे?"
राजद के नेता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह बदले की भावना से आवास खाली कराया जा रहा है। यह आदेश भाजपा सरकार के अत्यधिक हस्तक्षेप का परिणाम है।