कृषि कल्याण वर्ष: जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश के किसानों की दुर्दशा पर उठाए सवाल

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कृषि कल्याण वर्ष: जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश के किसानों की दुर्दशा पर उठाए सवाल

सारांश

जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 97 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबे हैं और राज्य सरकार ने केवल वादे किए हैं। जानें इस समस्या के पीछे का सच।

Key Takeaways

  • 97 प्रतिशत किसान कर्ज में हैं.
  • भाजपा ने चुनावी वादे नहीं निभाए.
  • कृषि विभाग में 60 प्रतिशत पद खाली.
  • कैग की रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आईं हैं.
  • कृषि कल्याण का आयोजन केवल दिखावा है.

भोपाल, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार द्वारा मनाए जा रहे कृषि कल्याण वर्ष पर कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि राज्य के किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय है और 97 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबे हुए हैं.

पटवारी ने कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव कृषि कल्याण वर्ष का आयोजन कर रहे हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 20 वर्षों से यह सरकार किसानों को सिर्फ वादों के सहारे धोखा दे रही है।

उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 20 साल से यही कहते आ रहे हैं कि हम कृषि को लाभकारी बनाएंगे और किसानों की आमदनी को दोगुना करेंगे, लेकिन वास्तव में किसानों की आत्महत्याएं और कर्ज बढ़ते जा रहे हैं। 20 साल में किसानों को धोखा देने वाले अब “कृषि कल्याण वर्ष” मनाने का दावा कर रहे हैं।

पटवारी ने स्पष्ट किया कि आज प्रदेश के 97 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबे हैं. भाजपा ने चुनाव के समय किसानों को तीन प्रमुख गारंटियां दी थीं, लेकिन आज तक एक भी पूरी नहीं हुई। सोयाबीन के लिए 6000 रुपए प्रति क्विंटल, धान के लिए 3100 रुपए प्रति क्विंटल और गेहूं के लिए 2700 रुपए प्रति क्विंटल का वादा किया गया था, लेकिन यह सब चुनावी घोषणाएं बनकर रह गईं।

उन्होंने आगे कहा कि मोहन यादव पिछले दो वर्षों से मुख्यमंत्री हैं और जनता इन वर्षों का हिसाब मांग रही है। प्रदेश के कृषि विभाग में लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। जब विभाग में कर्मचारियों की कमी होगी, तो किसानों की योजनाएं कैसे लागू होंगी?

पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री कृषि कल्याण दिवस मना रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि कई महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं में बजट का उपयोग नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 165 करोड़ का प्रावधान था, लेकिन आवंटन शून्य रहा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कृषि विभाग में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। फर्टिलाइजर डेवलपमेंट फंड, जिसे किसानों को प्रशिक्षण और उर्वरक प्रबंधन के लिए स्थापित किया गया था, का लगभग 90 प्रतिशत पैसा वाहनों और ड्राइवरों के वेतन में खर्च हुआ, जबकि किसानों तक केवल 10 प्रतिशत राशि ही पहुंची है।

Point of View

जिसमें किसानों की आर्थिक स्थिति और सरकारी नीतियों की विफलता शामिल है। यह चर्चा का विषय है कि कैसे सरकार अपने वादों को पूरा करने में असफल रही है।
NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज की स्थिति क्या है?
मध्य प्रदेश में लगभग 97 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबे हुए हैं।
कृषि कल्याण वर्ष का आयोजन क्यों किया जा रहा है?
राज्य सरकार किसानों की स्थिति में सुधार के लिए कृषि कल्याण वर्ष का आयोजन कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे केवल एक दिखावा मानता है।
किसानों को क्या वादे किए गए थे?
भाजपा ने चुनावों में सोयाबीन, धान और गेहूं के लिए मूल्य निर्धारण का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।
कृषि विभाग में पदों की स्थिति क्या है?
कृषि विभाग में लगभग 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जो किसानों की योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा डालते हैं।
कैग की रिपोर्ट में क्या समस्याएं सामने आई हैं?
कैग की रिपोर्ट में कृषि विभाग में गंभीर अनियमितताएं और फंड के गलत उपयोग का उल्लेख है।
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