19 अक्टूबर 2026
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किश्तवाड़ में एसपीओ बशीर अहमद की हत्या: पुलिस ने दो संदिग्ध गिरफ्तार किए, हथियार बरामद

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किश्तवाड़ में एसपीओ बशीर अहमद की हत्या: पुलिस ने दो संदिग्ध गिरफ्तार किए, हथियार बरामद

सारांश

किश्तवाड़ के त्रिगाम जंगल में एसपीओ बशीर अहमद का शव गड्ढे में दफन मिला। पुलिस ने 15 अक्टूबर को लापता होने की सूचना के बाद तलाशी शुरू की और दो स्थानीय निवासियों को गिरफ्तार किया। हत्या का मकसद अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जांच जारी है।

मुख्य बातें

एसपीओ बशीर अहमद 15 अक्टूबर 2026 को त्रिगाम पुलिस पिकेट से अपने सर्विस हथियार के साथ लापता हुए।
16 अक्टूबर को त्रिगाम जंगल के सेरान वानी इलाके में नाले के पास गड्ढे में शव बरामद हुआ।
पुलिस ने बशीर अहमद डार और नजीर अहमद डार — दोनों सेरान वानी निवासी — को गिरफ्तार किया।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज।
अपराध में इस्तेमाल हथियार और मृतक का सामान आरोपियों की निशानदेही पर बरामद ।
पुलिस ने हत्या का मकसद अभी तक सार्वजनिक नहीं किया; जांच जारी है।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) बशीर अहमद की कथित हत्या के मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। 16 अक्टूबर 2026 को त्रिगाम जंगल के सेरान वानी इलाके में एक नाले के पास गड्ढे में दबा हुआ शव बरामद होने के बाद यह कार्रवाई हुई। जांच में अपराध में इस्तेमाल हथियार और मृतक का सामान भी बरामद कर लिया गया है।

घटनाक्रम: लापता होने से शव मिलने तक

15 अक्टूबर 2026 को त्रिगाम स्थित पुलिस पिकेट से एसपीओ बशीर अहमद अपने सर्विस हथियार के साथ अचानक लापता हो गए। उनके गायब होने की सूचना मिलते ही किश्तवाड़ पुलिस ने कई टीमें बनाकर तलाशी अभियान शुरू किया।

16 अक्टूबर को तलाशी के दौरान पहले उनका सर्विस हथियार मिला और इसके बाद त्रिगाम जंगल के सेरान वानी इलाके में एक नाले के पास गड्ढे में दबा हुआ उनका शव बरामद किया गया।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

जांच के दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों की पहचान की — अब्दुल अजीज डार के पुत्र बशीर अहमद डार और बशीर अहमद डार के पुत्र नजीर अहमद डार। दोनों त्रिगाम के सेरान वानी के निवासी हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में हत्या के पीछे के मकसद और साजिश का पता चला है। उनकी निशानदेही पर अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार और मृतक का सामान भी जब्त कर लिया गया। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक सार्वजनिक रूप से हत्या के मकसद का खुलासा नहीं किया है।

कानूनी कार्रवाई

किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक मामले की आगे की जांच जारी है।

एसपीओ की भूमिका और महत्व

जम्मू-कश्मीर पुलिस में स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) एक सहायक बल के रूप में काम करते हैं। इन्हें 1995 में शुरू की गई एक योजना के तहत अनुबंध/अस्थायी आधार पर भर्ती किया जाता है, जिसका मूल उद्देश्य आतंकवाद से निपटने में नियमित बलों की मदद करना था।

एसपीओ आतंकवाद विरोधी अभियानों, गश्त, भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक व्यवस्था और स्थानीय पुलिसिंग कार्यों में चौबीसों घंटे सेवाएँ देते हैं। यह घटना ऐसे समय में आई है जब किश्तवाड़ और आसपास के जिलों में सुरक्षा बलों पर दबाव का माहौल बना हुआ है।

आगे की जांच

पुलिस ने पुष्टि की है कि दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और मामले में अन्य संभावित कोणों की भी जांच की जा रही है। हत्या के पूरे षड्यंत्र का खुलासा होने तक जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि एसपीओ प्रणाली 1995 से आतंकवाद-रोधी अभियानों की रीढ़ रही है, लेकिन इन कर्मियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था हमेशा विमर्श के हाशिए पर रही है। पुलिस ने मकसद का खुलासा न करके जांच की संवेदनशीलता का संकेत दिया है — यह मामला स्थानीय विवाद है या किसी बड़े षड्यंत्र से जुड़ा है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किश्तवाड़ में एसपीओ की हत्या का मामला क्या है?
एसपीओ बशीर अहमद 15 अक्टूबर 2026 को त्रिगाम पुलिस पिकेट से अपने सर्विस हथियार के साथ लापता हो गए थे। 16 अक्टूबर को उनका शव त्रिगाम जंगल के सेरान वानी इलाके में एक गड्ढे में दबा हुआ मिला और पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
किश्तवाड़ एसपीओ हत्याकांड में कौन गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने बशीर अहमद डार (पुत्र अब्दुल अजीज डार) और नजीर अहमद डार (पुत्र बशीर अहमद डार) को गिरफ्तार किया है। दोनों त्रिगाम के सेरान वानी के निवासी हैं।
एसपीओ बशीर अहमद की हत्या के पीछे क्या मकसद बताया गया है?
पुलिस के अनुसार आरोपियों से पूछताछ में हत्या के मकसद और साजिश का पता चला है, लेकिन अब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धारा लागू की गई है?
किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
जम्मू-कश्मीर में एसपीओ की क्या भूमिका होती है?
एसपीओ नियमित पुलिस और सुरक्षा बलों की सहायता करने वाला सहायक बल है, जिसे 1995 में आतंकवाद से निपटने के लिए शुरू किया गया था। ये आतंकवाद विरोधी अभियान, गश्त, भीड़ नियंत्रण और स्थानीय पुलिसिंग में चौबीसों घंटे सेवाएँ देते हैं और अनुबंध/अस्थायी आधार पर भर्ती होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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