किश्तवाड़ में एसपीओ बशीर अहमद सर्विस राइफल समेत लापता, सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 55 वर्षीय स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) बशीर अहमद अपनी सरकारी एसएलआर सर्विस राइफल समेत बुधवार से लापता हैं। उनके परिवार द्वारा सूचित किए जाने के बाद अधिकारियों ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को इसकी पुष्टि की और तलाशी अभियान तेज कर दिया।
लापता होने की परिस्थितियाँ
बशीर अहमद बुधवार सुबह त्रिघम पुलिस पिकेट पर अपनी ड्यूटी से निकलकर वनिपोरा त्रिघम स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए थे। जब वे तय समय पर घर नहीं पहुँचे, तो परिजनों ने पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचना दी।
एक अधिकारी के अनुसार, "वे अपनी सरकारी एसएलआर सर्विस राइफल के साथ लापता हो गए हैं। जाँचकर्ता सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके लापता होने के समय इलाके में भारी बारिश और खराब मौसम था। इससे आशंका जताई जा रही है कि शायद वे किसी खड़ी पहाड़ी से गलती से फिसल गए हों।" हालाँकि यह संभावना अभी तक पुष्ट नहीं हुई है और उनके लापता होने से जुड़ी परिस्थितियाँ अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।
तलाशी अभियान का विस्तार
पुलिस और अर्धसैनिक सुरक्षा बलों की कई टीमें किश्तवाड़ के आसपास के जंगलों, पहाड़ी रास्तों और स्थानीय गाँवों में व्यापक तलाशी ले रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार उनके लापता होने से जुड़ी सभी संभावित परिस्थितियों की जाँच की जा रही है — चाहे वह दुर्घटना हो, अपहरण हो या कोई अन्य कारण।
गौरतलब है कि सर्विस राइफल के साथ किसी सुरक्षाकर्मी का लापता होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सीधे तौर पर अत्यंत संवेदनशील मामला माना जाता है, विशेष रूप से तब जब क्षेत्र में उग्रवाद विरोधी अभियान सक्रिय हों।
एसपीओ की भूमिका और कानूनी दर्जा
जम्मू कश्मीर पुलिस में वर्तमान में लगभग 32,000 स्पेशल पुलिस ऑफिसर कार्यरत हैं। इन्हें 'जम्मू कश्मीर पुलिस अधिनियम, 1983' की धारा 18 के तहत नियुक्त किया जाता है और इनका मुख्य दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा उग्रवाद विरोधी अभियानों में नियमित पुलिस की सहायता करना है।
जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने कई बार स्पष्ट किया है कि एसपीओ नियमित सिविल पदों पर नहीं होते, इसलिए उन्हें अनुच्छेद 311 के तहत मिलने वाले पूर्ण संवैधानिक सुरक्षा कवच का लाभ नहीं मिलता। हालाँकि हाल के न्यायिक फैसलों के अनुसार, किसी कदाचार के आरोप में हटाने से पूर्व उन्हें नोटिस देना और पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है।
एसपीओ की नियमितीकरण नीति
जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने 'जम्मू कश्मीर पुलिस नियम, 1960' में संशोधन करते हुए कांस्टेबल भर्ती में एसपीओ के लिए 15 प्रतिशत और सेवारत फॉलोअर्स के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। कम से कम 3 वर्ष की सेवा देने वाले एसपीओ अथवा राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर उत्कृष्ट खिलाड़ी या आईटीआई/एआईसीटीई डिप्लोमा धारक एसपीओ को 40 वर्ष की आयु तक इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है।
आगे क्या
फिलहाल तलाशी अभियान जारी है और अधिकारी किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रहे। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ों की घटनाएँ बढ़ी हैं। लापता एसपीओ का शीघ्र पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता है, क्योंकि सर्विस राइफल की बरामदगी भी उतनी ही अहम है।