क्या जेएनयू परिसर में आपत्तिजनक नारे लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की?
सारांश
Key Takeaways
- जेएनयू में नारेबाजी का मामला गंभीर है।
- दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
- नारेबाजी ने विश्वविद्यालय की शांति को प्रभावित किया।
- वीडियो वायरल होने से मामला और बढ़ गया।
- प्रशासन ने स्थिति की निगरानी की।
नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने बुधवार को एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस ने इस एफआईआर में भड़काऊ बयान देने के लिए धारा 352 और सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए धारा 353 का प्रावधान लगाया है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब आरोपियों ने देशद्रोही शरजील इमाम और दंगाई उमर खालिद को जमानत नहीं मिलने पर आपत्तिजनक नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सबरमती हॉस्टल के बाहर की नारेबाजी के मामले में मंगलवार सुबह पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की औपचारिक अनुरोध भेजा गया था। प्रशासन ने अपनी शिकायत में बताया कि 5 जनवरी की रात लगभग 10 बजे, जेएनयू छात्रसंघ से जुड़े छात्रों द्वारा सबरमती हॉस्टल के बाहर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य 5 जनवरी 2020 को परिसर में हुई हिंसा की छठी बरसी को मनाना बताया गया था।
शुरुआत में यह सभा केवल बरसी तक सीमित दिखाई दी जिसमें लगभग 30 से 35 छात्र शामिल थे। शिकायत में जिन प्रमुख छात्रों के नाम शामिल हैं, उनमें अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान, शुभम आदि का उल्लेख है।
पत्र में कहा गया है कि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसले के बाद कार्यक्रम का स्वरूप और माहौल बदल गया। कुछ छात्रों ने बेहद आपत्तिजनक, उकसाने वाले और भड़काऊ नारे लगाने शुरू कर दिए।
प्रशासन का कहना है कि यह कृत्य न केवल लोकतांत्रिक असहमति की सीमाओं से परे है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के प्रति खुला अनादर भी है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि ऐसी नारेबाजी जेएनयू की आचार संहिता का भी उल्लंघन है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे परिसर की शांति, सौहार्द, सार्वजनिक व्यवस्था तथा सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी स्थल पर मौजूद थे, जिनमें निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और सुरक्षा गार्ड जय कुमार मीणा और पूजा शामिल थीं। वे लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे थे।