दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने मकोका मामले में नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से खुद को अलग किया

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दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने मकोका मामले में नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से खुद को अलग किया

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने नरेश बाल्यान की मकोका मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह मामला अब दूसरी बेंच के सामने पेश किया जाएगा। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • नरेश बाल्यान की जमानत याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग किया।
  • यह मामला अब 23 अप्रैल को दूसरी बेंच के सामने जाएगा।
  • बाल्यान को मकोका के तहत रंगदारी मामले में गिरफ्तार किया गया था।
  • पुलिस का कहना है कि वे एक बड़े आपराधिक गिरोह का हिस्सा हैं।
  • इस मामले में राजनीतिक आरोप भी सामने आए हैं।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने 'महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम' (मकोका) के तहत एक मामले में जमानत मांगी थी।

बाल्यान की जमानत याचिका, जो कि दिल्ली की एक अदालत द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ थी, को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। न्यायाधीश ने अब इस मामले को 23 अप्रैल को किसी अन्य बेंच के सामने प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।

उत्तम नगर के पूर्व विधायक को दिसंबर 2024 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मकोका के तहत फिर से गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी एक रंगदारी मामले में राहत मिलने के कुछ ही क्षण बाद हुई थी।

राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा रंगदारी मामले में जमानत दिए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया और संगठित अपराध से जुड़े मामले में अपनी हिरासत में लिया।

बाल्यान को पहली बार 30 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था, जब कुछ ऑडियो क्लिप सामने आई थीं जिसमें उन्हें कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के साथ बातचीत करते हुए सुना गया था। इन क्लिप्स से यह संकेत मिलता है कि दिल्ली में बिल्डरों और अन्य लोगों को धमकाकर पैसे वसूलने की योजना बनाई जा रही थी।

पुलिस का कहना है कि बाल्यान दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में सक्रिय एक बड़े आपराधिक गिरोह का हिस्सा है, जो रंगदारी और हथियारों की तस्करी जैसे संगठित अपराधों में संलिप्त है।

चार्जशीट में इस नेटवर्क को एक संगठित और योजनाबद्ध समूह बताया गया है, जो आर्थिक लाभ के लिए अवैध गतिविधियों में शामिल है। पुलिस द्वारा दायर एक पूरक चार्जशीट में चार आरोपियों के नाम शामिल हैं: विजय उर्फ कालू, साहिल उर्फ पोली, बालियान और ज्योति प्रकाश उर्फ बाबा

इससे पहले, बाल्यान की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा था कि जांच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और उनकी रिहाई से जांच में बाधा आ सकती है। हालांकि, बाल्यान और उनके समर्थकों का कहना है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और आरोप एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।

इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। भाजपा ने बाल्यान पर 'वसूली करने वाला' होने का आरोप लगाते हुए आप के नेताओं और आपराधिक तत्वों के बीच संबंधों का दावा किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि बाल्यान की गतिविधियां पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की जानकारी में चल रही थीं, जिसे आप ने सिरे से खारिज किया है।

Point of View

NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

नरेश बाल्यान को क्यों गिरफ्तार किया गया था?
उन्हें मकोका के तहत रंगदारी मामले में गिरफ्तार किया गया था, जब उनके खिलाफ ऑडियो क्लिप सामने आई थीं जिनमें वे गैंगस्टर से बात कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बाल्यान एक बड़े आपराधिक गिरोह का हिस्सा हैं जो रंगदारी और हथियारों की तस्करी में संलिप्त हैं।
इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं क्या हैं?
भाजपा ने बाल्यान पर वसूली करने का आरोप लगाया है, जबकि आप ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
जमानत याचिका का क्या हुआ?
जमानत याचिका को न्यायाधीश ने सुनवाई से अलग किया है और मामला अब दूसरी बेंच के पास जाएगा।
मकोका क्या है?
मकोका, या महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, संगठित अपराधों के खिलाफ कानून है।
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