क्या कच्छ के सीमावर्ती गांवों और उनके निवासियों ने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा है?

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क्या कच्छ के सीमावर्ती गांवों और उनके निवासियों ने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा है?

सारांश

कच्छ के सीमावर्ती गांवों में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने ग्रामीणों से बातचीत की, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन किया और सरकार की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने गांवों की सुरक्षा और विकास पर जोर दिया। क्या कच्छ के इन गांवों की स्थिति वाकई में बेहतर हो रही है?

मुख्य बातें

कच्छ के सीमावर्ती गांवों में सुरक्षा और विकास का मेल है।
सरकार ने गांवों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
स्थानीय निवासियों की देशभक्ति अद्वितीय है।
उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
गांवों में युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

गांधीनगर, 6 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित गांवों का निरीक्षण करने एवं उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समझने के लिए कच्छ पहुंचे उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने लखपत के पुनराजपर गांव का दौरा किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने कच्छ के लखपत तालुका के ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने गांव के सरपंच, बुजुर्गों और युवाओं से बातचीत कर सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त की।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि राज्य के 30 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी उनके साथ विभिन्न सीमावर्ती गांवों का दौरा कर रहे हैं। इन गांवों के दौरे में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी सुविधाओं सहित लगभग 40 विभिन्न मुद्दों पर ग्रामीणों के साथ गहन चर्चा कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

गांव को देश का पहला और गुजरात का प्रवेश द्वार बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांव पुनराजपर का एक गौरवशाली इतिहास है। पुनराजपर गांव देशभक्तों की भूमि है। यहां की जनसंख्या भले ही कम हो, लेकिन दुश्मन के खिलाफ लड़ने की इसकी क्षमता अपार है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसी व्यवस्थाएं की हैं कि हमें अपने सीमावर्ती गांवों की सुविधाओं से ईर्ष्या होती है। विकास के मामले में, सीमा पार पाकिस्तान के गांवों और भारत की ओर के गांवों में जमीन आसमान का अंतर है।

कच्छ के गांवों के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज सीमावर्ती गांवों में पानी, बिजली, स्वास्थ्य जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दुश्मन के कदमों को पहचानने की क्षमता यहां के गांवों के प्रत्येक व्यक्ति में वर्षों से मौजूद है। हर्ष संघवी ने दुश्मन को पहचानने की क्षमता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी विरासत के रूप में हस्तांतरित करके राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का अनुरोध किया।

कच्छ के गांवों को सीमा का रक्षक बताते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गांव के नागरिकों की देशभक्ति को सलाम किया और कहा कि कच्छ के इन गांवों और यहां के वीर ग्रामीणों ने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा है। उन्होंने ग्रामीणों से असामाजिक गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के संबंध में सरकार की आंख-कान बनने का अनुरोध किया।

इस अवसर पर अबडासा विधायक प्रद्युम्न सिंह जडेजा ने उपमुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कच्छ के विकास से अवगत कराते हुए सीमावर्ती गांवों के प्रति उनकी चिंता के लिए आभार व्यक्त किया। विधायक ने अनुरोध किया कि सीमावर्ती गांवों के अधिक से अधिक युवा देश की सेना में शामिल हों।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी का कच्छी संस्कृति के अनुसार कच्छी पग पहनाकर 'भारत माता की जय' के नारों के साथ स्वागत किया गया। इसके अलावा, उन्होंने गांव में ग्रामीणों के साथ दोपहर का भोजन किया और गांव की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की जानकारी ली।

उपमुख्यमंत्री ने बुजुर्गों और नागरिकों से बातचीत की और उन्हें आश्वासन दिया कि यदि कोई समस्या है, तो वे खुलकर बात कर सकते हैं और सरकार उसका समाधान अवश्य करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थानीय सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भी आवश्यक हैं। इन गांवों में सरकार की योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन एक सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपमुख्यमंत्री का कच्छ दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
उपमुख्यमंत्री का कच्छ दौरा सीमावर्ती गांवों की विकास स्थिति और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण है।
कच्छ के गांवों में कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं?
कच्छ के सीमावर्ती गांवों में पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
क्या गांवों के लोग दुश्मन को पहचान सकते हैं?
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यहां के गांवों के प्रत्येक व्यक्ति में दुश्मन के कदमों को पहचानने की क्षमता वर्षों से विद्यमान है।
राष्ट्र प्रेस
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