क्या जमशेदपुर के युवा उद्यमी कैरव गांधी 14 दिन बाद सकुशल बरामद हुए?
सारांश
Key Takeaways
- कैरव गांधी का अपहरण 14 जनवरी को हुआ था।
- उन्हें 27 जनवरी को बरामद किया गया।
- पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए विशेष जांच टीम का गठन किया।
- फिरौती की मांग 5 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ रुपये हुई।
- कैरव की सुरक्षित वापसी ने पूरे शहर को राहत दी।
जमशेदपुर, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जमशेदपुर के प्रसिद्ध उद्यमी देवांग गांधी के 24 वर्षीय बेटे कैरव गांधी को 14 दिनों के बाद अपहर्ताओं से रिहा कर दिया गया है। वह मंगलवार की सुबह लगभग 4.30 बजे अपने घर लौट आए हैं। पुलिस के अनुसार, उन्हें झारखंड के हजारीबाग और बिहार के गया बॉर्डर के बीच से बरामद किया गया।
जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय ने कैरव की सुरक्षित बरामदगी की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस का मुख्य ध्यान पीड़ित की सुरक्षा पर था, जिसमें उन्हें सफलता मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी और तकनीकी जांच लगातार चल रही है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
कैरव गांधी का अपहरण 13 जनवरी को दिन में 11.30 से 1 बजे के बीच हुआ था, जब वह अपनी क्रेटा कार से घर से निकले थे। उन्होंने अपने परिवार को बताया था कि वह पहले बिष्टुपुर स्थित एसबीआई बैंक जाएंगे और फिर आदित्यपुर में अपनी कंपनी पहुंचेंगे।
दोपहर 1.45 बजे तक घर नहीं लौटने और उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिलने पर उनकी तलाश शुरू की गई। थोड़ी देर बाद परिजनों को एक विदेशी नंबर से फोन आया, जिसमें कैरव के अपहरण की बात कही गई और 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। बाद में यह राशि बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सात विशेष जांच टीमों (एसआईटी) का गठन किया। ये टीमें झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में लगातार छापेमारी कर रही थीं। इस बीच, झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने दो दिन पहले खुद जमशेदपुर पहुंचकर कार्रवाई और जांच की प्रगति की जानकारी ली थी।
कैरव गांधी के सकुशल लौटने से पूरे शहर में राहत की लहर दौड़ गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी रिहाई पूरी तरह पुलिस की कार्रवाई का परिणाम है या परिवार के प्रयासों का। पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मामले का खुलासा कर सकती है।