कालिंदी कुंज हत्याकांड: जेल की पुरानी रंजिश में शाहिद हुसैन की चाकू मारकर हत्या, तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में 15 अक्टूबर 2026 को एक सुनियोजित साजिश के तहत शाहिद हुसैन की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जाँच के अनुसार यह हमला जेल के दौरान हुई पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए किया गया था। पुलिस अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और मामले की जाँच जारी है।
घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या
मृतक शाहिद हुसैन शाहीन बाग के अबुल फजल एन्क्लेव-II का निवासी था। पुलिस के अनुसार, हुसैन हरियाणा के बसंतपुर में मदनपुर खादर के रहने वाले शाबिद मलिक उर्फ मोनू से मिलने गया था। दोनों ने एक रेस्टोरेंट में बैठकर बीयर पी। जब हुसैन अपने स्कूटर से वापस लौट रहा था, तभी काले रंग की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर सवार चार लोगों ने उसे रोककर चाकू से हमला किया और फरार हो गए।
कालिंदी कुंज थाने के कांस्टेबल अवधेश ने घायल हुसैन को अपोलो अस्पताल पहुँचाया, लेकिन अस्पताल द्वारा शाम 5:32 बजे जारी मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट में पुष्टि की गई कि अस्पताल पहुँचने तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी। हेड कांस्टेबल मनीष ने ड्यूटी ऑफिसर को चाकूबाजी की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस दल श्रीराम चौक पहुँचा। घटनास्थल पर एक लावारिस स्कूटर और उसके पास खून के धब्बे मिले।
साजिश की परतें: बीयर पार्टी बनी जाल
पुलिस जाँच में सामने आया कि यह हत्या पूरी तरह से पूर्व-नियोजित थी। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि तरुण उर्फ रंजन और शाबिद मलिक ने मिलकर हुसैन को बीयर पार्टी के बहाने बुलाने और लौटते समय उस पर हमला करने की योजना बनाई थी। पुलिस के अनुसार, इस साजिश में गौरव गुम्मा, अमन और राजा भी कथित तौर पर शामिल थे।
27 वर्षीय अबूजर उर्फ सोनू ने इस अपराध के लिए अपनी नई खरीदी गई बाइक मुहैया कराई थी। पुलिस ने पूछताछ के लिए शाबिद मलिक को हिरासत में लिया और बाद में मदनपुर खादर की जेजे कॉलोनी के निवासी 21 वर्षीय करण उर्फ करम शाह को समोसा चौक के पास से पकड़ा। पुलिस के अनुसार हमले के दौरान करण के बाएं पैर में भी चाकू लगा था, क्योंकि वही मोटरसाइकिल चला रहा था।
हत्या की जड़: जेल में हुई रंजिश
पूछताछ में करण ने बताया कि यह हत्या हुसैन और तरुण के बीच जेल के दौरान हुई पुरानी रंजिश का परिणाम है। जेल में रहने के दौरान हुसैन ने तरुण को घायल किया था। तरुण को आशंका थी कि रिहाई के बाद हुसैन उसे निशाना बना सकता है, इसलिए उसने पहले वार करने की योजना बनाई।
यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि किस प्रकार जेल के भीतर पनपी दुश्मनियाँ बाहर आकर अपराध की शक्ल लेती हैं — यह दिल्ली में यह पहली ऐसी घटना नहीं है जहाँ जेल-काल की रंजिश सड़क पर खून बहाने तक पहुँची हो।
जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फरार साजिशकर्ताओं की तलाश जारी है। मामले में धारा ३०२ (हत्या) सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की न्यायिक हिरासत की प्रक्रिया चल रही है और बाकी आरोपियों तक जल्द पहुँचने का दावा किया जा रहा है।