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कर्नाटक के डिप्टी स्पीकर ने ग्रामीण बेदखली पर जताई चिंता, मांगी भूमि अधिकार

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कर्नाटक के डिप्टी स्पीकर ने ग्रामीण बेदखली पर जताई चिंता, मांगी भूमि अधिकार

सारांश

कर्नाटक विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लमानी ने ग्रामीणों के बेदखली पर चिंता जताई, यह मुद्दा केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में लोगों को प्रभावित कर रहा है।

मुख्य बातें

रुद्रप्पा लमानी का भावुक बयान ग्रामीण बेदखली की गंभीरता को दर्शाता है।
ग्रामीणों को भूमि अधिकार की आवश्यकता है।
यह समस्या केवल कर्नाटक में नहीं, बल्कि पूरे देश में फैली हुई है।
सरकार को इस मुद्दे पर त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।
लोकतंत्र में लोगों के जीने का अधिकार होना चाहिए।

हावेरी, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक विधानसभा के उपाध्यक्ष रुद्रप्पा लमानी ने शनिवार को हावेरी जिले के देवगिरी गांव के निकट आयोजित जिला पंचायत प्रगति समीक्षा बैठक में भावुकता के साथ ग्रामीणों के बेदखली के मुद्दे को उठाया। उन्होंने जंगल की भूमि से लोगों को बेदखल किए जाने की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि कई गांव आजादी से पहले से वन क्षेत्रों के निकट बसे हुए हैं, लेकिन अब वन विभाग इन क्षेत्रों को आरक्षित वन घोषित कर लोगों को बेदखल कर रहा है। इस प्रक्रिया के तहत ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा रही है, जिससे कई परिवार अपने घरों से विवश होकर भाग रहे हैं।

लमानी ने बताया कि हावेरी के गुट्टल टांडा और करूर गांव के निवासी पहले ही विस्थापित हो चुके हैं, और राज्य के लगभग २२ गांवों के लोग इसी समस्या का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में सरकार ने इन समुदायों को आवास और रोजगार के अवसर प्रदान किए थे, लेकिन अब वन विभाग इन्हें आरक्षित वन क्षेत्र बताकर नोटिस जारी कर रहा है।

लमानी ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं और केंद्रीय मंत्रियों एवं सांसदों से इस संबंध में चर्चा भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आदेश पारित करते समय कोई यह नहीं सोचता कि हजारों गरीब लोग कहां जाएंगे।

उन्होंने वन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि गरीबों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से प्रभावित लोगों को भूमि अधिकार (पट्टा) देने की मांग की।

लमानी ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल से ही झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को पट्टा देने की बात की गई थी, लेकिन अब वन अधिकारी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं।

उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि एक जनप्रतिनिधि को यह समस्या झेलनी पड़ रही है, तो आम जनता का क्या हाल होगा। उन्होंने बताया कि शिगगांव और कोलार में भी लोगों को बेदखली के नोटिस दिए गए हैं, जिससे उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।

लमानी ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को जीने का अधिकार है। यदि उन्हें बेदखली और एफआईआर का डर दिखाया जाएगा, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश भर में लोग इस संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार से अपील की कि लोगों को वहीं रहने दिया जाए, क्योंकि हर व्यक्ति को जीने का अधिकार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
RashtraPress
6 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में ग्रामीण बेदखली का मुद्दा क्या है?
यह मुद्दा उन ग्रामीणों से संबंधित है जिन्हें जंगल की भूमि से बेदखल किया जा रहा है।
रुद्रप्पा लमानी ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
लमानी ने ग्रामीणों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और भूमि अधिकार देने की मांग की।
क्या यह समस्या केवल कर्नाटक में है?
नहीं, यह समस्या देशभर में ग्रामीणों को प्रभावित कर रही है।
क्या सरकार ने इस समस्या का समाधान किया है?
सरकार ने अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं दिया है।
लोगों को बेदखली के खिलाफ क्या कदम उठाने चाहिए?
लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए और कानूनी सहायता प्राप्त करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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