कर्नाटक में मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस की कार्रवाई पर उठाए सवाल, पक्षपात का आरोप

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कर्नाटक में मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस की कार्रवाई पर उठाए सवाल, पक्षपात का आरोप

सारांश

कर्नाटक में मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस की कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है, जिसका आरोप है कि यह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ पक्षपात है। नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को चेतावनी दी है कि इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

Key Takeaways

  • कर्नाटक में मुस्लिम नेताओं का कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन।
  • पार्टी की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया गया।
  • मुस्लिम समुदाय में गहरा आक्रोश।
  • निर्णय ने राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित किया।
  • एकजुटता से कांग्रेस को चुनौतियां मिल सकती हैं।

बेंगलुरु, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में उपचुनाव के दौरान कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कांग्रेस द्वारा विधान परिषद सदस्यों अब्दुल जब्बार और नसीर अहमद के खिलाफ उठाए गए कदम पर मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने तीव्र विरोध व्यक्त किया है। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करार देते हुए पार्टी नेतृत्व को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

कांग्रेस ने एमएलसी नसीर अहमद को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार पद से हटा दिया है, जबकि अब्दुल जब्बार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। इससे पूर्व उनसे अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी मांगा गया था। इसके अलावा, वक्फ एवं आवास मंत्री जमीर अहमद खान के खिलाफ कार्रवाई की संभावना भी बढ़ रही है।

बेंगलुरु प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हज कमेटी के सदस्य और धार्मिक नेता मोहम्मद इफ्तिखार कासिम ने कांग्रेस के इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई केवल मुस्लिम नेताओं के खिलाफ ही क्यों हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस निर्णय ने मुस्लिम समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया है, और लोग पार्टी हाईकमान के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा, "एक उपचुनाव और एक परिवार के लिए कांग्रेस ने पूरे मुस्लिम समुदाय को अपने खिलाफ कर लिया है।" कासिम ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेताओं के समर्थन के कारण ही यह संकट उत्पन्न हुआ है और इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व ही जिम्मेदार है।

उन्होंने बागलकोट और दावणगेरे उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि मेटी परिवार को जो लाभ दिया गया, वही दावणगेरे में भी लागू किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि दिवंगत शमनूर शिवशंकरप्पा के परिवार को फिर से अवसर देने की क्या आवश्यकता थी, जबकि उनके बेटे मंत्री और बहू सांसद हैं। उन्होंने यह भी पूछा, "फिर उनके पोते को टिकट देने की क्या आवश्यकता थी?"

एक अन्य धार्मिक नेता जुल्फिकार अली ने आरोप लगाया कि एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने टिकट देने का वादा किया था, लेकिन बाद में मुकर गए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम नेताओं ने दावणगेरे और बागलकोट में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में काम किया, लेकिन मतदान खत्म होते ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी गई।

अली ने चेतावनी दी कि कांग्रेस को इसका सबक सिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि एएचआईएनडीए (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) समुदाय एकजुट हो जाएं, तो कांग्रेस या कोई भी पार्टी राजनीतिक रूप से प्रासंगिक नहीं रह पाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में दावणगेरे सीट के लिए टिकट मांगने पर कांग्रेस ने यह कहकर मना कर दिया था कि यह सीट मौजूदा विधायक शिवशंकरप्पा को देना जरूरी है। साथ ही यह आश्वासन दिया गया था कि अगली बार किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को मौका दिया जाएगा, लेकिन अब वह वादा पूरा नहीं किया गया।

Point of View

खासकर जब बात समुदायों की होती है। यह स्थिति कर्नाटक में राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

कांग्रेस ने मुस्लिम नेताओं के खिलाफ क्यों कार्रवाई की?
कांग्रेस ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कार्रवाई की है।
क्या यह कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है?
मुस्लिम नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है।
मुस्लिम नेता क्या चाहते हैं?
मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस से निष्पक्षता की मांग की है।
क्या कांग्रेस को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा?
मुस्लिम नेताओं ने चेतावनी दी है कि इससे कांग्रेस को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
एएचआईएनडीए समुदाय का क्या कहना है?
एएचआईएनडीए समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि वे एकजुट हो गए, तो कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक नहीं रह पाएगी।
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