क्या कर्नाटक सरकार ने आईपीएस अधिकारी को निलंबित किया, वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई?
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. के. रामचंद्र राव का निलंबन एक वायरल वीडियो के कारण हुआ।
- सरकार ने राजनीतिक विवाद से बचने के लिए यह कदम उठाया।
- जांच पूरी होने तक निलंबन लागू रहेगा।
बल्लारी, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक सरकार ने आईपीएस अधिकारी एवं सिविल राइट्स एनफोर्समेंट निदेशालय के महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. के. रामचंद्र राव को एक कथित 'हनीट्रैप' और अनुचित आचरण के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कदम उस समय उठाया गया जब उनके संबंध में एक वीडियो और समाचार विभिन्न चैनलों एवं सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए थे।
सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए डॉ. रामचंद्र राव को निलंबित करने का निर्णय लिया ताकि विधानसभा में सरकार को किसी प्रकार की राजनीतिक विवाद का सामना न करना पड़े। कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह कदम इसलिए भी उठाया गया ताकि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में न भुना सके।
इस संदर्भ में कर्नाटक सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। आदेश की प्रस्तावना में कहा गया है कि टीवी चैनलों और मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित वीडियो और समाचार रिपोर्टों में यह स्पष्ट हुआ है कि डॉ. के. रामचंद्र राव का आचरण एक सरकारी सेवक के मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे सरकार की छवि को ठेस पहुंची है।
सरकार ने जांच के बाद यह भी स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह आचरण ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 के नियम 3 का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित करने का निर्णय लिया गया।
आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि के दौरान डॉ. रामचंद्र राव को ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के नियम 4 के तहत भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें राज्य सरकार की लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
राज्य प्रशासन ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।