खल्लारी माता मंदिर: महाभारत से जुड़ा अद्भुत स्थल, संतान सुख की देवी

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खल्लारी माता मंदिर: महाभारत से जुड़ा अद्भुत स्थल, संतान सुख की देवी

सारांश

खल्लारी माता मंदिर, महासमुन्द की पहाड़ी पर स्थित, निसंतान दंपतियों को संतान सुख प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यहां हर साल भक्तों की भीड़ उमड़ती है, विशेषकर चैत्र नवरात्रि के दौरान।

Key Takeaways

  • खल्लारी माता मंदिर निसंतान दंपतियों के लिए प्रसिद्ध है।
  • यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
  • यहां पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन रोप-वे की सुविधा भी है।
  • हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां बड़े मेले का आयोजन होता है।
  • स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां जगदम्बा कन्या रूप में बाजार में आती थीं।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में अनेक शक्तिपीठ और सिद्धपीठ हैं, जहां भक्त अपनी कठिनाइयों से मुक्ति के लिए आते हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुन्द में एक ऐसा अद्भुत और प्रसिद्ध मंदिर है, जो निसंतान दंपतियों को संतान सुख प्रदान करता है।

यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और यहां पराक्रमी भीम के अस्तित्व के संकेत आज भी देखे जा सकते हैं। हम बात कर रहे हैं खल्लारी माता मंदिर की।

महासमुन्द से 25 किमी दक्षिण में खल्लारी गांव की पहाड़ी पर माता का मंदिर स्थित है। चूंकि यह पहाड़ी पर है, भक्तों को मां के दर्शन के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन अब रोप-वे की सुविधा भी उपलब्ध है। भक्तों को मंदिर तक पहुंचने के लिए 800 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। इस मार्ग का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है, और पहाड़ी से नज़ारा मनमोहक है।

इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से गहराई से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर भीम ने हिडिंब का वध किया था और माता कुंती के कहने पर हिडिंबा से विवाह किया।

यहां भीम ने अज्ञातवास के दौरान कई दिन विश्राम भी किया था, जिसका प्रमाण आज भी मंदिर की पहाड़ी पर मौजूद है। पहाड़ी की चोटी पर भीम के विशाल पदचिन्ह हैं। इसके अतिरिक्त, भीम चूल्हा और भीम की नाव भी पास में स्थित हैं। इसलिए इस स्थान को भीम खोज के नाम से जाना जाता है।

खल्लारी पहले हैहयवंश के राजा ब्रह्मदेव की राजधानी थी। उन्होंने मंदिर के निर्माण का कार्य आरंभ किया। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां जगदम्बा कन्या के रूप में खल्लारी के बाजार में आती थीं। एक बार एक बंजारा उनकी सुंदरता पर मोहित हो गया और उनके पीछे पहाड़ी की चोटी तक पहुंच गया। मां ने क्रोधित होकर उसे पत्थर में बदल दिया और पहाड़ी पर खल्लारी मां के नाम से स्थापित हो गईं।

हर वर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त इस दुर्गम पहाड़ी पर स्थित मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। हर साल चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है।

Point of View

जो न सिर्फ निसंतान दंपतियों के लिए वरदान है, बल्कि महाभारत के ऐतिहासिक संदर्भों को भी समेटे हुए है। यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व दोनों का संगम है।
NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

खल्लारी माता मंदिर कहां स्थित है?
खल्लारी माता मंदिर छत्तीसगढ़ के महासमुन्द जिले में पहाड़ी पर स्थित है।
क्या खल्लारी माता मंदिर का इतिहास महाभारत से जुड़ा है?
हां, इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
क्या इस मंदिर में पहुंचने के लिए कठिनाई होती है?
जी हां, मंदिर तक पहुंचने के लिए 800 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होती हैं, लेकिन रोप-वे की सुविधा भी उपलब्ध है।
इस मंदिर में कब मेला लगता है?
हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है।
क्या खल्लारी माता मंदिर में भक्तों की भीड़ होती है?
जी हां, विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
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