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क्या देश के इतिहास में पहली बार किसानों पर लगा टैक्स?, जीएसटी सुधार को लेकर खड़गे का वार

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क्या देश के इतिहास में पहली बार किसानों पर लगा टैक्स?, जीएसटी सुधार को लेकर खड़गे का वार

सारांश

कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जीएसटी सुधार को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया है। उन्होंने कहा है कि पहली बार किसानों पर टैक्स लगाया गया है। जानिए इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है और भाजपा के जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' का नाम क्यों दिया गया।

मुख्य बातें

किसानों पर पहली बार टैक्स लगाया गया है।
सरकार ने कृषि क्षेत्र की 36 वस्तुओं पर जीएसटी लागू किया है।
कांग्रेस ने जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' कहा है।
64 प्रतिशत जीएसटी गरीबों और मध्यम वर्ग से वसूला जाता है।
कॉर्पोरेट टैक्स की दर को घटाया गया है।

नई दिल्ली, 4 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को जीएसटी सुधार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि देश के इतिहास में पहली बार किसानों पर टैक्स लगाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने कृषि क्षेत्र की कम से कम 36 वस्तुओं पर जीएसटी लगा दिया है। इसलिए हमने भाजपा के इस जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' का नाम दिया।

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'कांग्रेस पार्टी ने अपने 2019 और 2024 के घोषणा पत्रों में सरल और तर्कसंगत कर व्यवस्था के साथ जीएसटी 2.0 की मांग की थी। हमने जीएसटी के जटिल कंप्लायंस को सरल बनाने की भी मांग की थी, जिससे एमएसएमई और छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। 28 फरवरी 2005 को कांग्रेस-यूपीए सरकार ने लोकसभा में जीएसटी की औपचारिक घोषणा की थी। 2011 में जब तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी जीएसटी विधेयक लेकर आए थे तो भाजपा ने इसका विरोध किया था। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने भी जीएसटी का विरोध किया था। आज यही भाजपा सरकार रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन का जश्न मना रही है, जैसे कि आम जनता से टैक्स वसूलकर उसने कोई बहुत बड़ा काम किया हो।'

खड़गे ने आगे कहा, 'देश के इतिहास में पहली बार किसानों पर टैक्स लगाया गया है। इस मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र की कम से कम 36 वस्तुओं पर जीएसटी लगाया है। दूध-दही, आटा-अनाज, यहां तक कि बच्चों की पेंसिल-किताबें, ऑक्सीजन, इंशोरेशन और अस्पताल के खर्च जैसी रोजाना की उपयोगी वस्तुओं पर भी जीएसटी लगाया गया है। इसीलिए हमने भाजपा के इस जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' का नाम दिया। कुल जीएसटी का दो-तिहाई यानी 64 प्रतिशत हिस्सा गरीबों और मध्यम वर्ग की जेब से आता है, लेकिन अरबपतियों से केवल 3 प्रतिशत जीएसटी लिया जाता है, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स की दर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं, पिछले 5 वर्षों में इनकम टैक्स वसूली में 240 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और जीएसटी वसूली में 177 प्रतिशत की वृद्धि हुई।'

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अंत में लिखा, 'यह अच्छा है कि सरकार की 8 वर्ष देर से ही सही जीएसटी पर कुंभकर्णी नींद खुली और उन्होंने जागकर रेट रेशनलाइजेशन की बात की है। सभी राज्यों को 2024-25 को आधार वर्ष मानकर 5 वर्षों की अवधि के लिए कंपनसेशन दिया जाए, क्योंकि दरों में कटौती से उनके राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।'

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समग्र आर्थिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है। यह जरूरी है कि सरकार इस पर ध्यान दे और किसानों की कठिनाइयों को समझे।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसानों पर टैक्स लगाने का क्या कारण है?
सरकार ने जीएसटी के तहत कृषि क्षेत्र की वस्तुओं पर टैक्स लगाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है।
जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' क्यों कहा गया?
कांग्रेस के अनुसार, यह टैक्स गरीबों और मध्यम वर्ग पर भारी पड़ता है, इसलिए इसे 'गब्बर सिंह टैक्स' का नाम दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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