7 अक्टूबर 2026
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क्रोंच पर्वत पर कार्तिक स्वामी मंदिर: जहाँ मूर्ति नहीं, भगवान कार्तिकेय की अस्थियों की होती है पूजा

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क्रोंच पर्वत पर कार्तिक स्वामी मंदिर: जहाँ मूर्ति नहीं, भगवान कार्तिकेय की अस्थियों की होती है पूजा

सारांश

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में क्रोंच पर्वत की चोटी पर बसे कार्तिक स्वामी मंदिर में कोई मूर्ति नहीं — यहाँ भगवान कार्तिकेय की पवित्र अस्थियों की पूजा होती है। पौराणिक कथा, हिमालय का अद्भुत दृश्य और CM धामी का आमंत्रण — यह मंदिर आस्था और रहस्य का अनूठा संगम है।

मुख्य बातें

कार्तिक स्वामी मंदिर , रुद्रप्रयाग जिले के क्रोंच पर्वत पर स्थित है और भगवान शिव-पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है।
यहाँ भगवान कार्तिकेय की मूर्ति नहीं , बल्कि उनकी पवित्र अस्थियों (शिला रूप) की पूजा होती है — जो इसे भारत के अन्य मंदिरों से अलग बनाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी से स्पर्धा में पराजित होने के बाद कार्तिकेय ने अपना शरीर त्याग कर अस्थियाँ भगवान शिव को अर्पित की थीं।
मंदिर की चोटी से त्रिशूल , नंदा देवी और चौखंबा हिमालयी शिखर दिखाई देते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष मेले व अनुष्ठान होते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं को दर्शन का आमंत्रण दिया।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में क्रोंच पर्वत के शिखर पर विराजमान कार्तिक स्वामी मंदिर देवभूमि के उन दुर्लभ तीर्थस्थलों में से एक है, जहाँ भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा नहीं, बल्कि उनकी पवित्र अस्थियों (शिला रूप में) की पूजा की जाती है। 7 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मंदिर का वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं को यहाँ आने का आमंत्रण दिया।

मंदिर की पौराणिक कथा

इस मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान कार्तिकेय और गणेश को ब्रह्मांड की परिक्रमा करने को कहा गया, तो कार्तिकेय यात्रा पर निकल पड़े। गणेश जी ने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा कर उन्हें ही अपना ब्रह्मांड माना और विजेता घोषित हुए। इससे रुष्ट होकर कार्तिकेय ने अपने शरीर का त्याग कर दिया और अपनी अस्थियाँ भगवान शिव को समर्पित कर दीं।

मान्यता है कि इस मंदिर के गर्भ गृह में आज भी भगवान कार्तिकेय की वे पवित्र अस्थियाँ विद्यमान हैं। यहाँ उनकी पाषाण रूपी प्रतीकात्मक आकृति की उपासना की जाती है, जो इस मंदिर को भारत के अन्य कार्तिकेय मंदिरों से सर्वथा अलग बनाती है।

मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद कार्तिक स्वामी मंदिर, भगवान शिव के सबसे बड़े बेटे और दिव्य सेना के कमांडर भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक दिव्य और पवित्र जगह है। ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक आभा, पुरानी धार्मिक मान्यताओं और चारों ओर से फैली मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के कारण एक खास जगह रखता है।'

धामी ने आगे लिखा, 'आस्था, प्रकृति और हिमालयी संस्कृति का यह अनोखा संगम उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को और भी समृद्ध बनाता है। आपको भी रुद्रप्रयाग की अपनी यात्रा के दौरान इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए।'

प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक वातावरण

मंदिर के शिखर से त्रिशूल, नंदा देवी और चौखंबा जैसी हिमाच्छादित हिमालयी चोटियाँ स्पष्ट दिखाई देती हैं, जो इस स्थान की आध्यात्मिक भव्यता को और बढ़ाती हैं। मंदिर परिसर में सैकड़ों घंटियाँ बँधी हैं, जिनकी मधुर ध्वनि दूर-दूर तक गूँजती रहती है।

मान्यता है कि इस पवित्र हिमालयी क्षेत्र में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। गौरतलब है कि गढ़वाल क्षेत्र में ऐसे अनेक दुर्लभ मंदिर हैं जो अपनी अनूठी पूजा परंपराओं के कारण देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

विशेष पर्व और उत्सव

प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में विशेष मेले और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हिमालय की गोद में रोमांचक ट्रेकिंग और पर्यटन के लिए भी एक प्रमुख गंतव्य बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तराखंड की उस अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाती है जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर उपेक्षित रह जाती है। मुख्यमंत्री धामी का सोशल मीडिया पोस्ट एक रणनीतिक कदम भी है — राज्य के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक नीति के तहत। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार चारधाम के अलावा अन्य दुर्लभ तीर्थस्थलों को भी राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने का प्रयास कर रही है, और कार्तिक स्वामी जैसे मंदिर इस 'हिडन जेम' अभियान के केंद्र में हैं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्तिक स्वामी मंदिर कहाँ स्थित है?
कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में क्रोंच पर्वत के शिखर पर स्थित है। यह गढ़वाल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों में से एक है।
कार्तिक स्वामी मंदिर में मूर्ति की जगह अस्थियों की पूजा क्यों होती है?
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मांड परिक्रमा की स्पर्धा में गणेश जी से पराजित होने पर भगवान कार्तिकेय ने अपने शरीर का त्याग कर अस्थियाँ भगवान शिव को समर्पित कर दीं। मान्यता है कि वे अस्थियाँ आज भी मंदिर के गर्भ गृह में शिला रूप में विद्यमान हैं, इसीलिए यहाँ मूर्ति नहीं, अस्थियों की पूजा होती है।
कार्तिक स्वामी मंदिर में कौन-से प्रमुख पर्वों पर विशेष आयोजन होते हैं?
इस मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष मेले और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। इन पर्वों पर देशभर से हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
CM पुष्कर सिंह धामी ने कार्तिक स्वामी मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर इसे 'दिव्य और पवित्र जगह' बताया। उन्होंने कहा कि आस्था, प्रकृति और हिमालयी संस्कृति का यह अनोखा संगम उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को और समृद्ध बनाता है।
कार्तिक स्वामी मंदिर से हिमालय की कौन-सी चोटियाँ दिखाई देती हैं?
मंदिर के शिखर से त्रिशूल, नंदा देवी और चौखंबा जैसी बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं। यह प्राकृतिक सौंदर्य मंदिर की आध्यात्मिक आभा को और बढ़ा देता है।
राष्ट्र प्रेस
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