कुमार सानू का जन्मदिन: जगजीत सिंह के घर 12 कुत्तों के बीच फंसे थे, फिर बदली किस्मत
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के सदाबहार पार्श्व गायक कुमार सानू का आज 19 अक्टूबर 2026 को 69वाँ जन्मदिन है। 20 अक्टूबर 1957 को कोलकाता में जन्मे कुमार सानू का असली नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है — वही नाम जिसे वे खुद पसंद नहीं करते थे, और जिसे बदलकर उन्होंने एक नई पहचान गढ़ी। नब्बे के दशक में उनकी आवाज़ ने रोमांटिक बॉलीवुड संगीत को एक नया मुहावरा दिया, जो आज भी करोड़ों दिलों में ताज़ा है।
नाम की कहानी: केदारनाथ से कुमार सानू तक
उनके पिता पशुपति नाथ भट्टाचार्य शिव भक्त थे और इसीलिए उन्होंने बेटे का नाम केदारनाथ रखा। लेकिन यह नाम कुमार सानू को कभी रास नहीं आया। जब संगीत की शुरुआती तालीम के दौरान उनका परिचय कल्याणजी-आनंदजी से हुआ, तो उन्हें नाम बदलने की सलाह दी गई। घर में प्यार से 'सानू' बुलाए जाने वाले इस गायक ने 'कुमार' जोड़ा और यों बन गया — कुमार सानू।
शुरुआत में उन्होंने सानू भट्टाचार्य के नाम से करियर आज़माया। पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन संगीत की धुन ने उन्हें कोलकाता के एक होटल में ₹4,000 प्रति माह पर बतौर गायक काम करने पर मजबूर कर दिया — और यह सफर 1979 में शुरू हुआ था।
मुंबई का सफर: ₹1,100 उधार और एक बड़ा सपना
कोलकाता की सीमाएँ जब छोटी लगने लगीं, तो 1986 में कुमार सानू ने मुंबई की राह पकड़ी। बताया जाता है कि उन्होंने बड़े भाई से ₹1,100 उधार लिए और सपनों के शहर पहुँचे। शुरुआती दिनों में आराधना गेस्ट हाउस में नौकरी मिली। यही वह जगह थी जहाँ महान ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह अपनी ग़ज़लें रिकॉर्ड करने आया करते थे।
गौरतलब है कि उनका पहला बॉलीवुड गाना 'जश्न है मोहब्बत का' था, जो 1988 की फिल्म 'हीरो हीरालाल' के लिए था। इससे पहले वे एक बांग्ला फिल्म में भी काम कर चुके थे।
जगजीत सिंह के घर 12 कुत्तों के बीच वह यादगार मुलाकात
कुमार सानू ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वे उसी स्टूडियो में किशोर कुमार के गाने रिकॉर्ड कर रहे थे, तभी जगजीत सिंह ने उनकी आवाज़ सुनी और काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कुमार सानू को अगले दिन दोपहर 12 बजे अपने घर बुलाया।
कुमार सानू ने उस मुलाकात का वर्णन करते हुए कहा, 'जब मैं जगजीत सिंह जी के घर गया था, तो हॉल में 12 कुत्ते थे। मुझे हॉल में ही इंतजार करने के लिए बोला गया था। मुझे देखकर हॉल के अंदर के कुत्ते भी बैठ गए थे। मैं थोड़ी देर बाद हारमोनियम बजाने के लिए बढ़ा और हाथ रखा, सामने के दो-तीन कुत्तों ने भौंकना शुरू कर दिया था और इसी कारण मैं वहां शुरू में जिस तरह बैठा था, उसी तरह बैठना पड़ा।'
घर के भीतर जब मुलाकात हुई, तो जगजीत सिंह ने उन्हें 'मेरे सामने वाली खिड़की' जैसा कोई तेज़-तर्रार किशोर कुमार गाना सुनाने को कहा। इसके बाद उन्होंने एक नया गाना सीखने के लिए पेन और कागज़ दिया। कुमार सानू के अनुसार, उन्होंने 5 मिनट में वह गाना याद किया और फिर जगजीत सिंह उन्हें तारदेव के 'फेमस स्टूडियो' ले गए।
लगभग 10-15 मिनट में गाने की रिकॉर्डिंग पूरी हुई। जगजीत सिंह ने तुरंत उन्हें गले लगाया और अपनी जेब से ₹1,500 निकालकर दिए। इसके बाद दोनों पेडर रोड पर कल्याणजी-आनंदजी से मिलने गए। संगीत निर्देशक जोड़ी को गाना बेहद पसंद आया और इस तरह कुमार सानू के बॉलीवुड करियर की नींव पड़ी।
करियर का शिखर: 'आशिकी' से गिनीज़ रिकॉर्ड तक
आगे चलकर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, नौशाद और राहुल देव बर्मन (पंचम दा) जैसे दिग्गज संगीतकारों के लिए कुमार सानू ने गाने गाए। अलका याग्निक के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय जोड़ियों में गिनी जाती है।
रोमांटिक फिल्म 'आशिकी' के गाने इनकी पहचान बन गए और यह गाने आज भी उसी ताज़गी के साथ सुने जाते हैं। कुमार सानू ने लगातार पाँच फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। इसके अलावा उन्होंने एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करके गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया — यह उपलब्धि आज भी बॉलीवुड में अद्वितीय मानी जाती है।
69वें जन्मदिन पर कुमार सानू की वह सफर — उधार के ₹1,100, 12 कुत्तों वाला हॉल और जगजीत सिंह का वह हाथ जिसने उन्हें बुलंदियों तक पहुँचाया — हिंदी फिल्म संगीत की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक बनी हुई है।