क्या कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी?
सारांश
मुख्य बातें
कुशीनगर, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। पूर्वांचल के लिए हवाई कनेक्टिविटी का सपना अब हकीकत बनने के बेहद करीब है। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत की संभावनाएं अब काफी बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आइएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) के लिए अधिग्रहित भूमि पर आठ किसानों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस फैसले से एयरपोर्ट के संचालन की सबसे बड़ी बाधा भी समाप्त हो गई है।
जिला प्रशासन ने भलुही मदारी पट्टी के आठ किसानों को नोटिस जारी कर ४८ से ७२ घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने और मकान खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। गौरतलब है कि २०२० में एयरपोर्ट के विस्तार के लिए ५४७ किसानों से ३०.१४ एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आठ किसानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और स्टे ले लिया था। इस कारण लंबे समय से आइएलएस और डीवीओआर (डॉपलर वेरी ओमिनी रेंज) सिस्टम की इंस्टॉलेशन का काम अटका हुआ था।
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने किसानों की याचिका खारिज कर बंजर खाते की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। इसके बाद एयरपोर्ट पर आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगाने की राह खुल गई है। एयरपोर्ट निदेशक प्रणेश कुमार राय ने बताया कि हाईकोर्ट का आदेश हमारे पक्ष में आया है। हमने तैयारियां तेजी से शुरू कर दी हैं और विमानन कंपनियों से लगातार संपर्क में हैं। हमारी कोशिश है कि जल्द ही कुशीनगर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं शुरू हो सकें।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने एयरलाइंस को आकर्षित करने के लिए विशेष रियायतें देने का ऐलान किया है। तीन वर्षों तक एयरलाइंस को लैंडिंग चार्ज फ्री रहेगा। इसके अलावा, यूजर डेवलपमेंट चार्ज (UDC) में भी बड़ी छूट दी गई है। एयरलाइंस को पहले वर्ष १०० प्रतिशत, दूसरे वर्ष ७० प्रतिशत और तीसरे वर्ष ४० प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लंबे समय से पूर्वांचल और बिहार के यात्रियों के लिए आशा की किरण माना जा रहा है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद न केवल घरेलू उड़ान बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी का रास्ता भी खुल गया है। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि इससे पर्यटन, कारोबार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।