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क्या घर का दरवाजा किस्मत का रास्ता तय करता है? वास्तु की ये गलती बढ़ा सकती है परेशानी

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क्या घर का दरवाजा किस्मत का रास्ता तय करता है? वास्तु की ये गलती बढ़ा सकती है परेशानी

सारांश

क्या आप जानते हैं कि आपके घर का प्रवेश द्वार आपकी किस्मत पर असर डाल सकता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह दरवाजा केवल एक दरवाजा नहीं है, बल्कि घर की आत्मा है। जानिए कैसे सही दिशा और स्थान से आपकी जीवन में खुशहाली आ सकती है।

मुख्य बातें

प्रवेश द्वार को घर की आत्मा माना जाता है।
सही दिशा में बना द्वार सुख और समृद्धि लाता है।
दक्षिण दिशा का द्वार भी शुभ हो सकता है।
द्वार की बनावट महत्वपूर्ण होती है।
अंधेरा या गंदगी द्वार के सामने नहीं होनी चाहिए।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में जब लोग घर बनाते हैं, तो वे डिजाइन, रंग और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान देते हैं, लेकिन घर के प्रवेश द्वार को अक्सर अनदेखा कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रवेश द्वार को केवल एक दरवाजा नहीं, बल्कि घर की आत्मा माना गया है। यहीं से हर दिन ऊर्जा, सोच और माहौल घर में प्रवेश करता है।

यदि यह सही स्थान और दिशा में हो, तो जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, लेकिन यदि इसमें कोई गड़बड़ी हो जाए, तो बिना किसी कारण परेशानी जीवन में दस्तक देने लगती है।

कुछ लोग मानते हैं कि दक्षिण दिशा अशुभ होती है या उत्तर दिशा हमेशा शुभ होती है, लेकिन यह अधूरी जानकारी है। वास्तु के अनुसार, हर दिशा के भीतर कई छोटे-छोटे हिस्से होते हैं, जिन्हें पद या ग्रिड कहा जाता है। यदि मुख्य द्वार सही पद पर बना हो, तो वही दिशा शुभ फल देती है, और यदि गलत पद पर हो, तो अच्छी मानी जाने वाली दिशा भी परेशानी का कारण बन सकती है।

दक्षिण दिशा के बारे में सबसे अधिक भ्रम है। बहुत से लोग मानते हैं कि दक्षिणमुखी घर में रहने से नुकसान होता है, लेकिन वास्तु शास्त्र इसे पूरी तरह से गलत मानता है। दक्षिण दिशा को ऊर्जा, स्थिरता और अनुशासन की दिशा कहा गया है। यदि इस दिशा में प्रवेश द्वार सही स्थान पर हो, तो ऐसा घर व्यक्ति को धन, प्रतिष्ठा और समाज में सम्मान दिला सकता है। कई सफल और प्रभावशाली लोग दक्षिणमुखी घरों में रहते हैं। परेशानी तब होती है, जब यह द्वार गलत पद पर बना हो। तब वही घर मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।

पूर्व दिशा को सूरज की दिशा कहा जाता है। सूरज जैसे पूरी दुनिया को रोशनी देता है, वैसे ही पूर्व दिशा में बना सही प्रवेश द्वार घर में नई ऊर्जा भर देता है। इस दिशा का द्वार बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और विचार पर अच्छा असर डालता है। यह घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखता है, जिससे लोग अधिक सक्रिय और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। यदि यही द्वार पूर्व दिशा में गलत स्थान पर बने, तो आलस्य और अस्थिरता भी बढ़ सकती है।

उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना गया है। वास्तु के अनुसार, यह कुबेर की दिशा है। इस दिशा में सही पद पर बना मुख्य द्वार घर में आय के नए रास्ते खोल सकता है। नौकरी, व्यापार, और करियर से जुड़े मामलों में लाभ मिलता है। घर में पैसों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन यदि उत्तर दिशा का द्वार गलत स्थान पर हो तो खर्च बढ़ सकता है और मेहनत के बावजूद परिणाम कमजोर मिल सकते हैं।

मुख्य द्वार की दिशा के साथ-साथ उसकी बनावट भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। वास्तु शास्त्र कहता है कि प्रवेश द्वार मजबूत, साफ और सुंदर होना चाहिए। टूटा हुआ, चरमराता या गंदा दरवाजा नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। मुख्य द्वार घर के बाकी दरवाजों से थोड़ा बड़ा होना शुभ माना गया है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बिना रुकावट अंदर आ सके। द्वार के सामने अंधेरा, कूड़ा, शौचालय या भारी चीजें होना अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि लोग अपने घर के दरवाजे की दिशा और स्थिति को गंभीरता से लें। सही दिशा में बना द्वार न केवल सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में भी खुशहाली और समृद्धि लाता है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रवेश द्वार की दिशा का क्या महत्व है?
प्रवेश द्वार की दिशा घर में ऊर्जा के प्रवाह को निर्धारित करती है। सही दिशा में बना द्वार सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है।
क्या दक्षिण दिशा में घर होना शुभ है?
दक्षिण दिशा को अशुभ मानना गलत है। यदि यह सही स्थान पर बना हो, तो यह धन, प्रतिष्ठा और स्थिरता का स्रोत हो सकता है।
क्या द्वार की बनावट भी महत्वपूर्ण है?
हाँ, द्वार की बनावट मजबूत, साफ और सुंदर होनी चाहिए। टूटा या गंदा दरवाजा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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