क्या आपकी ये गलती टाइफाइड का कारण बन सकती है? आयुर्वेद से जानिए बचाव के उपाय
सारांश
Key Takeaways
- टाइफाइड
- स्वच्छता का ध्यान रखें और साफ पानी का सेवन करें।
- आयुर्वेदिक उपायों जैसे गिलोय और तुलसी का उपयोग करें।
- पाचन सुधारने वाले हल्के भोजन का सेवन करें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आजकल टाइफाइड (मियादी बुखार) एक सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन गई है। यह बीमारी मुख्य रूप से गंदा पानी, अस्वच्छ भोजन और खराब जीवनशैली के कारण फैलती है। अक्सर लोग मानते हैं कि यह केवल संक्रमित व्यक्ति से ही फैलती है, परंतु वास्तव में आपकी दैनिक कुछ आदतें भी टाइफाइड का कारण बन सकती हैं।
हाथ धोए बिना खानाटाइफाइड जैसे रोग आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया आंत, रक्त और यकृत-प्लीहा तक फैलता है और तेज बुखार, पेट दर्द, कमजोरी, भूख न लगना और जीभ पर सफेद परत जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह आंतों में अल्सर, आंतरिक रक्तस्राव और अन्य गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न कर सकता है।
आयुर्वेद में टाइफाइड को 'मियादी ज्वर' कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार, जब हमारी जठराग्नि यानी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, तब रोगाणु आसानी से शरीर में पनपते हैं। इसलिए टाइफाइड से बचाव और इलाज के लिए आयुर्वेद में ज्वरनाशन, अग्नि दीपना, पाचन सुधार और ओज-वर्धन जैसे सिद्धांतों पर जोर दिया गया है।
उदाहरण के लिए, गिलोय का रस इम्युनिटी बढ़ाने और बुखार कम करने में सहायक है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बैक्टीरिया को नष्ट करने में अत्यंत प्रभावी है। मुलेठी, लौंग का पानी और सुदर्शन चूर्ण भी शरीर की ताकत और पाचन सुधारने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, आयुर्वेद में रोजमर्रा की आदतों का भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। साफ पानी पीना, पका और ताजा खाना खाना, हाथ धोना, पाचन सुधारने वाले हल्के भोजन जैसे मूंग दाल की पतली खिचड़ी, छाछ या पका केला लेना, और नियमित रूप से आयुर्वेदिक हर्ब्स का सेवन करना टाइफाइड से बचाव में बहुत प्रभावी है।