क्या डीएमके की संशोधित पेंशन योजना केवल चुनावी रणनीति है? : नैनार नागेंथ्रान

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क्या डीएमके की संशोधित पेंशन योजना केवल चुनावी रणनीति है? : नैनार नागेंथ्रान

सारांश

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने डीएमके की नई पेंशन योजना की आलोचना की है, इसे चुनाव से जुड़ा कदम मानते हुए कहा कि यह जनता को गुमराह करने का प्रयास है। क्या यह वास्तव में एक रणनीति है या कुछ और?

मुख्य बातें

डीएमके ने 2021 में ओपीएस का वादा किया था।
नागेंद्रन ने इसे चुनावी हथकंडा बताया।
सरकारी कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की गई है।
इस योजना का उद्देश्य confusion पैदा करना है।
भविष्य में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस की संभावनाएँ।

चेन्नई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने राज्य सरकार द्वारा घोषित नई पेंशन योजना की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे चुनावी कदम करार दिया और कहा कि यह सत्ताधारी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के कार्यकाल के अंतिम चरण में जनता को गुमराह करने का प्रयास है।

नागेंद्रन ने कहा कि डीएमके ने 2021 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को पुनः लागू करने का स्पष्ट वादा किया था, लेकिन लगभग पांच वर्षों तक वह अपने वादे को पूरा करने में असफल रही।

उन्होंने कहा, "अपने पूरे कार्यकाल के दौरान चुप रहने के बाद, सरकार ने चुनाव से ठीक पहले अचानक एक संशोधित पेंशन योजना की घोषणा की है। इससे उसकी ईमानदारी पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।"

घोषणा के समय पर सवाल उठाते हुए, भाजपा नेता ने पूछा कि डीएमके सरकार को अब कार्रवाई के लिए किसने प्रेरित किया और क्या यह वादा कभी वास्तव में लागू किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के बीच भ्रम पैदा करना और उनके प्रतिनिधि संगठनों, विशेषकर तमिलनाडु शिक्षक संगठनों और सरकारी कर्मचारी संगठनों की संयुक्त कार्रवाई परिषद (जेएसीटीओ-जीईओ) को गुमराह करना था, जो लगातार ओपीएस की बहाली की मांग कर रही है।

नागेंद्रन ने आगे दावा किया कि नर्सों, सफाई कर्मचारियों और माध्यमिक ग्रेड शिक्षकों सहित सरकारी कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों द्वारा बार-बार किए गए विरोध प्रदर्शनों के बावजूद डीएमके सरकार से कोई सार्थक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उन्होंने आरोप लगाया, "लगातार आंदोलनों और अपीलों के बावजूद, उनकी वास्तविक मांगों को नजरअंदाज कर दिया गया। अब, चुनाव नजदीक आने पर, सरकार खुद को कर्मचारी-हितैषी दिखाने की कोशिश कर रही है।"

नागेंद्रन ने जिसे अधूरे वादों का सिलसिला बताया, उसे याद करते हुए कहा कि डीएमके नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) को समाप्त करने और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 100 रुपये की कमी सहित प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में भी विफल रही है।

उन्होंने कहा, "ये वादे आज भी अधूरे हैं।"

विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए, नागेंद्रन ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के हालिया तमिलनाडु दौरे का प्रभाव जल्द ही जमीन पर दिखाई देगा।

उन्होंने डीएमके पर नकली धर्मनिरपेक्षता का अभ्यास करने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि चुनावों के बाद नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) तमिलनाडु में अगली सरकार बनाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

नैनार नागेंद्रन की बातें एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। यह स्पष्ट है कि चुनावी समय में ऐसे वादे अक्सर उठाए जाते हैं। जनता को सतर्क रहना चाहिए और वादों की सच्चाई को समझने का प्रयास करना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएमके की नई पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
डीएमके की नई पेंशन योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के बीच भ्रम पैदा करना है, खासकर चुनाव के नजदीक।
क्या भाजपा इस योजना का विरोध कर रही है?
हाँ, भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इस योजना की कड़ी आलोचना की है और इसे चुनावी हथकंडा बताया है।
नागेंद्रन ने डीएमके पर क्या आरोप लगाया है?
नागेंद्रन ने डीएमके पर वादे पूरे न करने और सरकारी कर्मचारियों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया है।
क्या यह योजना वास्तव में लागू होगी?
इस पर कोई स्पष्टता नहीं है, और भाजपा नेता ने इसे केवल चुनावी दिखावा बताया है।
क्या इस योजना का प्रभाव आगामी चुनावों पर पड़ेगा?
यह निश्चित रूप से राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
राष्ट्र प्रेस
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