क्या हमें आगे बढ़ने के लिए 'स्वदेशी' को अपनाना चाहिए? : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

सारांश
Key Takeaways
- स्वदेशी अपनाना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यक है।
- आत्मनिर्भरता का प्रतीक है स्वदेशी।
- हमारे किसानों और कारीगरों का सम्मान है।
- स्वदेशी से गांव और उद्योग दोनों मजबूत होंगे।
- भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'स्वदेशी अपनाओ' अभियान के संदर्भ में कहा है कि यदि हमें उन्नति करनी है, तो हमें स्वदेशी को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाना, भारत को अपनाना है।
केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "स्वदेशी ही भारत की असली ताकत है। अगर हमें आगे बढ़ना है, तो हमें स्वदेशी को अपनाना होगा। स्वदेशी सिर्फ एक वस्त्र या वस्तु नहीं है, यह आत्मनिर्भरता का मंत्र है। यह हमारे किसानों की मेहनत का सम्मान है, हमारे कारीगरों के हुनर की पहचान है और यह हमारे उद्योगों एवं युवाओं की शक्ति है।"
उन्होंने आगे लिखा, "स्वदेशी का अर्थ है अपनी माटी की खुशबू। स्वदेशी का मतलब है वह समान, जिसे हमारे देशवासियों ने बनाया है। जब हम स्वदेशी अपनाते हैं, तो हम केवल एक वस्तु का चुनाव नहीं करते, बल्कि भारत के भविष्य का चुनाव करते हैं।"
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में लिखा, "स्वदेशी से ही हमारे गांव मजबूत होंगे, किसान संपन्न होंगे, उद्योग बढ़ेंगे और भारत आत्मनिर्भर बनेगा।"
इससे पहले, शिवराज सिंह चौहान ने 'आईआईएसईआर' भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की है और हमें उस अपील पर ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा है कि हम अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें।"
उन्होंने आगे कहा, "आप सभी से निवेदन है कि अपने दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली चीजों में स्वदेश में बने उत्पादों का ही उपयोग करें। यह हमारे देश के लोगों को रोजगार देगा और हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा।"
गौरतलब है कि 15 अगस्त को 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 'स्वदेशी' अपनाने का आह्वान किया था। फिलहाल उनकी पहल पर स्वदेशी अपनाने की मुहिम ने जोर पकड़ लिया है। सरकार और सत्ताधारी पार्टी की तरफ से इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है।