क्या जोकीहाट विधानसभा चुनाव में तस्लीमुद्दीन परिवार का प्रभाव समाप्त होगा?

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क्या जोकीहाट विधानसभा चुनाव में तस्लीमुद्दीन परिवार का प्रभाव समाप्त होगा?

सारांश

जोकीहाट विधानसभा सीट पर पिछले कई दशकों से तस्लीमुद्दीन परिवार का वर्चस्व रहा है। क्या इस बार चुनावी मैदान में उनका प्रभाव समाप्त होगा? यह जानने के लिए पढ़ें।

Key Takeaways

  • जोकीहाट विधानसभा सीट का मुस्लिम मतदाताओं पर गहरा प्रभाव है।
  • तस्लीमुद्दीन परिवार का लंबे समय से इस सीट पर वर्चस्व जारी है।
  • राजद और जदयू के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है।
  • 2020 में चुनावी ड्रामा ने राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया।
  • कृषि और रोजगार की कमी यहां की महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के अररिया जिले में स्थित जोकीहाट विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्व इस बात से उजागर होता है कि यहां किसी भी पार्टी का उम्मीदवार हो, लेकिन जीत का फैसला मुस्लिम वोटरों के हाथ में होता है। इस सीट पर जदयू, राजद और कांग्रेस जैसे दलों का लंबे समय तक वर्चस्व रहा है, जो इसे क्षेत्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है।

जोकीहाट अपनी सामाजिक-आर्थिक और संस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है, जहां ग्रामीण और शहरी आबादी का अद्भुत मिश्रण है। इस क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या और प्राथमिकताएं समय-समय पर बदलती रही हैं, जिससे यह सीट हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है। हाल के वर्षों में यहां राजद, जदयू और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है।

जोकीहाट विधानसभा सीट का गठन 1967 में हुआ था और अब तक यहां 16 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1996 और 2018 में हुए दो उपचुनाव भी शामिल हैं। इस सीट की एक विशेषता यह है कि यहां से अब तक सभी विधायक मुस्लिम समुदाय से ही चुने गए हैं, जिसका मुख्य कारण क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या (लगभग 65.70 प्रतिशत) है।

इस सीट पर लंबे समय तक वरिष्ठ नेता मोहम्मद तस्लीमुद्दीन और उनके परिवार का वर्चस्व रहा है। तस्लीमुद्दीन और उनके बेटों ने 16 में से 10 बार इस सीट पर जीत हासिल की है। तस्लीमुद्दीन ने कांग्रेस (1969), निर्दलीय (1972), जनता पार्टी (1977, 1985) और समाजवादी पार्टी (1995) के टिकट पर जीत दर्ज की।

1996 में तस्लीमुद्दीन की राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री के बाद उनके बेटे सरफराज आलम ने विरासत संभाली। उन्होंने 1996 के उपचुनाव में जनता दल और 2000 में राजद से जीत दर्ज की। हालांकि, 2005 के चुनाव में जदयू के मंजर आलम ने उन्हें हराया। 2010 के चुनाव में सरफराज आलम ने फिर से वापसी की और उनकी जीत का क्रम 2015 में भी जारी रहा। उन्होंने दोनों बार जीत जदयू के टिकट पर हासिल की।

2020 के विधानसभा चुनाव में जोकीहाट में कुल 2,93,347 मतदाता रजिस्टर्ड थे, जिनमें 1,92,728 (65.70 प्रतिशत) मुस्लिम और 22,001 (7.5 प्रतिशत) अनुसूचित जाति के मतदाता थे। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में यहां मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,05,595 हो गई।

2020 के विधानसभा चुनाव में सियासी ड्रामा भी देखने को मिला। राजद ने तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम को यहां से उतारा, जबकि उनके भाई शाहनवाज आलम को एआईएमआईएम ने टिकट दिया। दोनों भाइयों की इस लड़ाई ने जोकीहाट की चुनावी लड़ाई को रोमांचक बना दिया, जिसमें शाहनवाज आलम ने एआईएमआईएम के टिकट पर जीत हासिल की। हालांकि, कुछ समय बाद वह राजद में शामिल हो गए।

जोकीहाट की भौगोलिक और आर्थिक गतिविधियों को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि यहां की जनता मुख्य रूप से कृषि और संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां के प्रमुख मुद्दों में बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार शामिल हैं।

कोसी नदी के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में बसा यह क्षेत्र धान, मक्का और जूट की खेती के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है, जिसमें प्रवासी श्रमिकों से मिलने वाली धनराशि भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, रोजगार की कमी यहां की एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती बनी हुई है।

Point of View

इस सीट का चुनावी इतिहास और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। चुनावी प्रक्रिया में बदलाव और क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए, यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक समीकरण कैसे बदलते हैं।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

जोकीहाट विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्व क्या है?
जोकीहाट विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्व इस बात से है कि यहां जीत का फैसला मुख्यतः मुस्लिम मतदाताओं के हाथ में होता है।
तस्लीमुद्दीन परिवार का इस सीट पर कितना प्रभाव रहा है?
तस्लीमुद्दीन परिवार ने इस सीट पर 16 में से 10 बार जीत हासिल की है, जो उनके लंबे समय के राजनीतिक वर्चस्व को दर्शाता है।
क्या जोकीहाट में सियासी ड्रामा होता है?
हाँ, 2020 के विधानसभा चुनाव में तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम और शाहनवाज आलम के बीच की लड़ाई ने चुनाव को रोमांचक बना दिया।
जोकीहाट की प्रमुख समस्याएं क्या हैं?
यहां की प्रमुख समस्याओं में बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार शामिल हैं।
जोकीहाट का आर्थिक आधार क्या है?
जोकीहाट की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है, जिसमें धान, मक्का और जूट की खेती होती है।