क्या मणिशंकर अय्यर के पास अज्ञानता का भंडार है?
सारांश
Key Takeaways
- मणिशंकर अय्यर के बयानों पर भाजपा सांसद की तीखी प्रतिक्रिया।
- हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का महत्व।
- पाकिस्तान के प्रति अय्यर का समर्थन विवादास्पद।
- राज ठाकरे की राजनीतिक स्थिति और उनके बयानों का महत्व।
- सरकार की योजनाएँ सभी वर्गों के लिए।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर के हिंदुत्व संबंधी बयानों पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि मुझे लगता है कि उनके पास अज्ञानता का एक बड़ा भंडार है। उन्होंने बताया कि मणिशंकर अय्यर अपने बेतुके बयानों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। चूंकि अब कांग्रेस पार्टी में उनका महत्व कम हो गया है, इसलिए वे मीडिया में बने रहने के लिए ऐसी अजीब बातें करते हैं।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में, प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हिंदू धर्म को किसी भी रूप में भारत से अलग नहीं किया जा सकता। यह हमारी संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा है। उनका यह कहना कि हिंदू धर्म केवल एक राजनीतिक विचारधारा है, यह दर्शाता है कि उन्होंने भारत का इतिहास बिल्कुल भी नहीं पढ़ा है। कुछ लोग उन्हें विद्वान मानते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि उनके पास ज्ञान का अभाव है।
मणिशंकर अय्यर के पाकिस्तान से संबंधित बयान पर प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक भारत से आतंकवाद समाप्त नहीं होता, तब तक 'ऑपरेशन सिंदूर' जारी रहेगा। मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान का समर्थन क्यों कर रहे हैं? उन्हें पहले यह तय करना चाहिए कि वे पाकिस्तान के प्रवक्ता हैं या भारत के नागरिक। ऐसे व्यक्तियों में समस्या यह है कि वे भारतीय होने के बावजूद अपने देश से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं रखते।
प्रवीण खंडेलवाल ने यह भी सवाल उठाया कि उस देश से बातचीत क्यों की जाए, जो हमारे देश के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है और अपनी धरती पर आतंकवादी ठिकाने बनाए हुए है? मेरा मानना है कि मणिशंकर अय्यर को पहले यह तय करना चाहिए कि वे भारतीय हैं या पाकिस्तान के प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे हैं।
बीएमसी चुनाव के बीच में राज ठाकरे के एक बयान पर प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राज ठाकरे एक निराश व्यक्ति हैं, जिन्होंने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण अपने परिवार से दूरी बना ली है। लेकिन पूरा देश जानता है कि वे अपने राजनीतिक करियर में असफल रहे हैं और अब घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, अगर देखा जाए तो राज ठाकरे के बयानों का अब कोई महत्व नहीं रह गया है, क्योंकि बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों को दोनों ठाकरे भाइयों ने समाप्त कर दिया है। नतीजतन, वे अब निश्चित रूप से बेकार हो गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का उल्लेख करते हुए प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर विश्वास करती है, जिसमें सभी वर्गों के लोग शामिल होते हैं। सरकार की योजनाओं का लाभ सभी वर्गों को मिलता है, और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है।