क्या प्रधानमंत्री मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार किया है? : कांता नलवाडे

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क्या प्रधानमंत्री मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार किया है? : कांता नलवाडे

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कांता नलवाडे ने अटल के सपनों को साकार करने की बात की और मोदी के नेतृत्व में भारत के विकास की उम्मीद जताई।

Key Takeaways

  • राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर किया गया।
  • कांता नलवाडे ने अटल के सपनों को साकार करने की बात की।
  • पीएम मोदी का नेतृत्व भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अटल बिहारी वाजपेयी की सोच और दृष्टि को आगे बढ़ाने में मोदी का योगदान है।
  • युवाओं को पीएम मोदी से प्रेरणा मिलती है।

मुंबई, २५ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की १०१वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष कांता नलवाडे ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि अटल का सपना भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था। ग्रामीण विकास कार्यक्रम और सड़क परियोजनाएं अटल की पहल थीं।

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को पीएम मोदी ने साकार किया। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनेगा।

कांता नलवाडे ने कहा, "अटल सबको समय देते थे। उन्होंने लगन से काम किया। अटल का सपना था कि भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। नदी जोड़ने की परियोजनाएं भी उनके विजन के तहत पूरी हुईं। विज्ञान के क्षेत्र में, उनका मानना था कि भारत को प्रगति करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रेरणा स्थल हर कार्यकर्ता के लिए है। यह इतिहास को जानने का स्थल है। पीएम मोदी जब किसी भी राज्य में प्रवास के लिए जाते हैं तो वहां का पूरा इतिहास निकालते हैं। वहां राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता कौन थे? यह सब जानकारी हासिल करने के बाद वह अपने भाषण में इनका इस्तेमाल करते थे। यही काम अटल बिहारी वाजपेयी भी करते थे। ऐसे में प्रेरणा स्थल बनना ही चाहिए।

कांता नलवाडे ने कहा, "मुझे अटल के साथ काम करने का मौका मिला। वह २००० में अखिल भारतीय भाजपा सचिव बनीं। उस समय अटल प्रधानमंत्री थे। तीन साल बाद, वह महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं, और उन्होंने अटल के साथ मिलकर काम करना जारी रखा। उस समय, नरेंद्र मोदी हमारी पार्टी के संगठन महासचिव थे।

कांता नलवाडे ने कहा, "मैं १९७३ से राजनीति में काम कर रही हूं और लगभग १९९० से केंद्रीय नेतृत्व से जुड़ी हुई हूं। जब भी मुंबई से कोई अध्यक्ष बनता था, तो उन्हें हमेशा केंद्रीय बैठकों में जाना पड़ता था, और तब से मैं अटल को देख रही हूं। जब १९८० में भारतीय जनता पार्टी बनी तो अटल किसी होटल में नहीं रुके। समता नगर में टेंट लगे हुए थे, वहीं पर सब लोग रुके थे। इतनी बड़ी हस्ती और उनका रहन-सहन बहुत साधारण था। हमारी उत्तराखंड के मसूरी में मीटिंग थी। हम ट्रेन से देहरादून तक गए, इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवानी समेत कई लोग थे। इस प्रवास के दौरान अटल सबके पास आकर बातें करते थे। उनको मराठी बहुत पसंद थी। मसूरी में जब मीटिंग खत्म हो गई तो उस समय सिकंदर बख्त वहां थे। भोजन करने के बाद एक साथ करीब १५ लोग बैठे थे। इसी बीच अटल बोले कि हम सब एक-एक अनुभव साझा करते हैं कि आपने कैसे शुरू किया जनसंघ या भारतीय जनता पार्टी। इस दौरान मैंने कहा कि मेरे पति जनसंघ से जुड़े थे। इसके बाद मैं भी जनसंघ से जुड़ गई।"

कांता ने कहा कि मुझे सिकंदर बख्त का जवाब बहुत अच्छा लगा। अटल ने सिकंदर बख्त से पूछा कि आप तो कांग्रेस में थे। इस पर सिकंदर बख्त ने कहा कि जनसंघ के समय दिल्ली कारपोरेशन के चुनाव थे और मैं ऑल इंडिया कांग्रेस का जनरल सेक्रेटरी था। शाम को वोटिंग खत्म होने के बाद घर आया और आते ही माता जी से पूछा कि आपने मतदान किया क्या? माताजी ने हां में जवाब दिया और बख्त अपने कमरे की तरफ जाने लगे। इसके बाद माताजी ने कहा कि पूछा नहीं कि मैंने किसको वोट किया है। सिकंदर ने कहा कि इसमें पूछने जैसा क्या है। आपने कांग्रेस को ही वोट किया होगा। उन्होंने न में जवाब दिया और बताया कि सुबह से चार बजे तक चार लड़के बार-बार घर आते थे और बोलते थे कि माताजी आप हमारे साथ वोटिंग करने के लिए चलिए। दो-तीन बार मैंने टाल दिया, लेकिन अंत में उनके साथ चली गई। उन्होंने जो बैच लगाया था, उस पर दीपक का निशान था। मैं दीपक पर मुहर लगाकर आई हूं। उन्होंने सिकंदर बख्त को बताया कि ऐसी पार्टी के लिए काम किया करो। इसके बाद इमरजेंसी के दौरान वह भारतीय जनता पार्टी में जुड़ गए।

कांता ने कहा कि पीएम मोदी का विजन मॉडल अटल का दिया हुआ मार्गदर्शन है। अटल के जो सपने बाकी थे, वे पीएम मोदी पूरे कर रहे हैं। दोनों के व्यक्तित्व में बहुत अंतर है। अटल बिहारी वाजपेयी बहुत भावुक थे। सभी के साथ उनका व्यवहार अच्छा था। विपक्ष भी उनसे प्यार करते थे।

नरेंद्र मोदी एक मिनट भी नष्ट नहीं करना चाहते हैं। 'टाइम इज मनी,' ऐसा पीएम मोदी का सोचना है। वह खुद के समय की बचत करते हैं और उस समय को देश के लिए लगाते हैं। जहां अटल को नॉन-वेज पसंद था, वहीं पीएम मोदी इससे परहेज करते हैं। नरेंद्र मोदी को विश्व गुरु माना जाता है, और वह भी ऐसे हैं।

कांता ने पुराने किस्से को याद करते हुए बताया कि अटल को भोजन बनाना बहुत पसंद था। वह खाने में खिचड़ी पसंद करते थे। उनको मराठी भाषा के बारे में कविताओं पर बोलना बहुत अच्छा लगता था।

कांता ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि बहुत सारी महिलाएं कहती हैं कि वह जब तक हैं प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। आज के दौर में युवा हमारे साथ ज्यादा संख्या में जुड़े हैं। युवाओं को पीएम मोदी से प्रेरणा मिलती है। पीएम मोदी के अनुरूप ही पार्टी कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। वे प्रेस वार्ता करके समय गंवाना नहीं चाहते। उनके काम से ही लोगों को जवाब मिल जाता है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित बनेगा।

Point of View

यह स्पष्ट है कि अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ाने में नरेंद्र मोदी का योगदान महत्वपूर्ण है। कांता नलवाडे के अनुभव हमें यह दिखाते हैं कि कैसे एक नेता की सोच और दृष्टि उनके अनुयायियों को प्रेरित कर सकती है। यह भारत के विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
NationPress
13/02/2026

Frequently Asked Questions

अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती कब मनाई गई?
अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती २५ दिसंबर को मनाई गई।
कांता नलवाडे ने किस बात पर जोर दिया?
कांता नलवाडे ने अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार करने और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के विकास पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल क्या है?
राष्ट्र प्रेरणा स्थल वह स्थान है जहां अटल बिहारी वाजपेयी की सोच और दृष्टि को सम्मानित किया गया है।
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